पाकिस्तान में तालिबान के खिलाफ कार्रवाई जारी, सेनाध्यक्ष ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने को कहा (राउंडअप)
कयानी ने यह टिप्पणी रावलपिंडी के पास स्थित सेना मुख्यालय में आयोजित कार्प्स कमांडरों के 118वें सम्मलेन के उद्घाटन के मौके पर व्यक्त की।
इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन्स (आईएसपीआर) की ओर से जारी एक बयान में कयानी के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान अपनी सेना की मदद से उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत (एनडब्ल्युएफपी) के तीन जिलों में व्याप्त वर्तमान संकट से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
उधर, अशांत स्वात घाटी में गुरुवार को पाकिस्तानी जेट विमानों ने तालिबान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। संघर्ष तेज होने के कारण स्थानीय नागरिकों के पलायन का सिलसिला जोर पकड़ने लगा है।
सैन्य कार्रवाई में तेजी ऐसी समय में आई है, जब अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार को बार-बार आगाह कर रही है। संगठन का कहना है कि इस क्षेत्र में मानवीय संकट बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तानी वायु सेना के जेट विमानों ने ख्वाजाखेला इलाके में तालिबान के ठिकानों पर हमला किया। यह इलाका स्वात जिले के मुख्य शहर मिंगोरा से करीब 25 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा सेना के हेलिकॉप्टर से कई राकेट भी दागे गए।
एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया है कि सेना ने कोरई, जाबलुस सिराज और मलाम जब्बा इलाकों में भी तालिबान पर हमले किए हैं।
अधिकारी ने कहा है, "सेना ने जमीनी हमले भी किए, लेकिन इसमें उसे आतंकवादियों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है।" अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस हमले में कितने लोग मारे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि मृतकों की संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि संघर्ष लंबा चला है।
दूसरी ओर अशांत पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में तालिबानी आतंकवादियों ने एक सुरक्षा चौकी पर हमला कर स्थानीय कबायली पुलिस बल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों को अगवा कर लिया। बंधकों को छुड़ाने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान तीन बंधक मारे गए।
देर बुधवार को निचले दीर जिले के चकदारा इलाके में आतंकवादियों ने सुरक्षा चौकी पर घात लगाकर हमला किया था। वहां स्थानीय कबीलों के प्रतिनिधित्व करने वाले नागरिक पुलिस बल के जवान तैनात थे। आतंकवादियों ने एक दर्जन से अधिक जवानों को अगवा कर लिया। स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
सुरक्षा बलों ने अगवा किए जवानों को मुक्त कराने के लिए अभियान तेज कर दिया है। 'जियो न्यूज' चैनल के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि जवाबी कार्रवाई में आतंकवादियों को नुकसान हुआ है या नहीं।
पाकिस्तान सरकार और तालिबान के बीच शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले कट्टपंथी मौलाना सूफी मुहम्मद का बेटा पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में हुई गोलाबारी में मारा गया है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने गुरुवार को 'जियो टीवी' के हवाले से खबर दी है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-नफज-ए-शरीयत-ए-मुहम्मदी (टीएनएसएम) के प्रवक्ता अमीर इज्जत खान ने बताया है कि निचले दीर इलाके में मौलाना सूफी का बेटा मौलाना किफायतुल्लाह मारा गया और उसका सहयोगी घायल हो गया है।
सेना ने दीर में तालिबान के खिलाफ कार्रवाई 26 अप्रैल को शुरू की थी और दो दिन बाद ही यह कार्रवाई बुनेर में भी आरंभ कर दी गई थी।
उधर, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के एक सहयोगी ने कहा है कि देश में सुरक्षा की नाजुक स्थिति को देखते हुए उनके शीघ्र स्वदेश लौटने की संभावना नहीं है।
मुशर्रफ पर खुद के शासनकाल में भी दो बार जानलेवा हमला हो चुका है और वह तालिबान तथा अन्य आतंकवादी संगठनों की हिटलिस्ट में हैं।
आतंकवाद और तालिबान से मुकाबले पर आयोजित एक व्याख्यानमाला में भाषण देने के लिए इस समय मुशर्रफ लंदन में हैं। इसके बाद वह अमेरिका जाएंगे और वहां से यूरोप के दौरे पर रवाना होंगे।
सुरक्षा खतरे के अलावा मुशर्रफ को आशंका है कि उन पर संविधान के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में राजद्रोह का मुकदमा भी चलाया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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