अब पुजारियों के कंधों पर होगी बंदूक

पिछले कुछ अरसे से छतरपुर के मंदिरों में हुई चोरी की वारदातों ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। जिले में ऐतिहासिक और पुरा महत्व के कई मंदिर हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस चिंतित है। लेकिन पुलिस के लिए मंदिरों की रखवाली आसान नहीं है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल मिश्र बताते हैं कि जिले के मंदिरों को उनके धार्मिक महत्व, उनकी प्राचीनता और सुरक्षा को ध्यान में रखकर कई श्रेणियों में बांटा गया है। मिश्र के मुताबिक जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा की गई संयुक्त समीक्षा में मंदिरों की सुरक्षा में आम आदमी की हिस्सेदारी महसूस की गई है।
इसके लिए तय किया गया है कि ऐतिहासिक महत्व, कीमती मूर्तियों और आस्था के आधार पर मंदिरों के पुजारियों को शस्त्र लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे। इन पुजारियों को मंदिर परिसर में ही निवास करना होगा। ऐसा होने पर मंदिरों में चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाना आसान हो जाएगा।
जिला प्रशासन ने तय किया है कि जिन मंदिरों में पुजारी नहीं हैं, वहां के लिए ऐसे व्यक्ति की खोज की जाएगी जो निष्पक्ष, पारदर्शी, गुटबाजी से दूर होगा तथा उसका आपराधिक गतिविधियों से कोई नाता नहीं होगा। इसके अतिरिक्त कस्बों और गांव के लोगों से भी मंदिरों की सुरक्षा में मदद लेने के प्रयास पुलिस द्वारा किए जा रहे हैं। लोगों को इस बात के लिए जगाया जा रहा है कि वे अपने गांव तथा घर की सुरक्षा से निश्चिंत होकर मंदिरों की सुरक्षा में भी हाथ बटाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications