नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन के बने रहने की संभावना
काठमांडू, 8 मई (आईएएनएस)। नेपाल में दो वर्ष पहले शांति प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए विवादास्पद रूप से प्रवेश करने वाली संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक शाखा को जुलाई में समाप्त होने वाले कार्यकाल के बाद संभवत: नया विस्तार मिल सकता है।
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएन) की स्थापना जनवरी 2007 में माओवादी पार्टी के आग्रह पर हुई थी। भारत ने आरंभ में इस मिशन का विरोध किया था।
यूएनएमआईएन से माओवादी पार्टी की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और उसके हथियारों के साथ ही संविधान सभा के चुनावों की निगरानी के लिए कहा गया था।
जहां अप्रैल 2008 के चुनाव के बाद नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन को बंद करना था वहीं पीएलए के सेना में विलय और उसके शिविरों को नष्ट करने की कार्रवाई तक यूएनएमआईएन की उपस्थिति आवश्यक समझी गई।
यूएनएमआईएन के कार्यकाल का अभी तक तीन बार विस्तार किया जा चुका है। भारत,चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूएनएमआईएन को दोनों सेनाओं के विलय में अधिक गहराई से शामिल नहीं होने के लिए सफलतापूर्वक पैरवी कर चुके हैं।
माओवादी पार्टी ने हाल में ही कहा था कि पीएलए का सेना में विलय मध्य जुलाई तक पूरा हो जाएगा और उसके बाद यूएनएमआईएन को अपना कार्यालय बंद करने के लिए कहा जाएगा। बहरहाल सोमवार को माओवादी सरकार के पतन और बड़ी पार्टियों से उसके बढ़ते मतभेदों के कारण पीएलए और सेना का विलय मध्य जुलाई तक असंभव दिखाई दे रहा है।
नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल 'प्रचंड' के मीडिया सलाहकार ओम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को यूएनएमआईएन के प्रमुख केरिन लेंडग्रीन ने प्रधानमंत्री से भेंट की।
माओवादी पार्टी, सेना और अन्य पार्टियों के यूएनएमआईएन से संबंध कभी बहुत अच्छे और कभी बहुत ठंडे रहे हैं। कई मौकों पर उस पर पक्षपात के आरोप लगे लेकिन संयुक्त राष्ट्र संस्था ने उन आरोपों से हमेशा इंकार किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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