बांग्लादेश के संविधान में 'धर्मनिरपेक्षता' को शामिल किया जाएगा
बांग्लादेश के कानून मंत्री शफीक अहमद ने इस संबंध में जानकारी दी। वर्ष 2005 में उच्च न्यायालय के एक फैसले ने संविधान के पांचवें संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए संविधान में 'बिस्मिल्ला' को शामिल किया था और 'धर्मनिरपेक्षता' को हटा दिया था।
उच्च न्यायालय के फैसले को अपीलीय खंडपीठ ने चुनौती दी थी। अहमद ने कहा कि खंडपीठ ने बाद में अपने फैसले में संविधान में सबसे ऊपर 'बिस्मिल्ला' को रखने का आदेश दिया था।
बांग्लादेशी समाचार पत्र 'न्यू एज' ने अहमद के हवाले से खबर प्रकाशित की है। अहमद ने कहा, "यदि पांचवें संविधान संशोधन को रद्द भी कर दिया जाता है तो भी संविधान में राज्य के प्रमुख चार सिद्धांत लोकतंत्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद बने रहेंगे।" उन्होंने कहा कि ये चारों सिद्धांत वर्ष 1972 के मूल संविधान में शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि संविधान में 'बिस्मिल्ला' को बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद बनी सरकार ने शामिल किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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