प्रचंड का वीडियो टेप, शांति प्रक्रिया बाधित

प्रचंड के अनुसार इसका उद्देश्य भिन्न रणनीति के साथ पूरी सत्ता पर कब्जा करना है। इस टेप के जारी होने से जहां माओवादी पार्टी की कार्यवाहक सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है,वहीं इससे शांति प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर भी संदेह पैदा हो गया है।
नेपाल के दक्षिणी चितवन जिले में स्थित शक्तिखोर प्रशिक्षण शिविर में संविधान सभा के चुनाव से कुछ समय पहले ही प्रचंड ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के गुरिल्लाओं से कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सत्यापन के समय उन्होंने पीएलए के लड़ाकों की संख्या को करीब पांच गुना बताया था।
उन्होंने कहा,"हमारी संख्या करीब सात-आठ हजार थी लेकिन यदि हम संयुक्त राष्ट्र को यह बताते तो सत्यापन के बाद हमें 4,000 तक सीमित कर दिया जाता। इसलिए हमने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि हमारी संख्या 35,000 है और सत्यापन के बाद अब पीएलए की सदस्य संख्या 20,000 के करीब है।"
प्रचंड ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा पीएलए की सदस्य संख्या 19,600 तक सीमित करने से निराश नहीं होना चाहिए। एक बार सत्ता में आने के बाद इसे बदला भी जा सकता है।
टेप से यह भी साबित होता है कि प्रचंड ने कहा कि उनकी पार्टी हथियार खरीदना जारी रखेगी। उन्होंने कहा,"हथियारों के लिए हमें धन की जरूरत है। कोई भी उन्हें मुफ्त में नहीं देता।"
प्रचंड ने कहा कि गठबंधन सरकार पर दबाव डालकर उन्होंने पीएलए सदस्यों को वेतन देने पर राजी किया। सरकार से मिले पैसे का कुछ हिस्सा गुरिल्लाओं को जाएगा और बाकी का हथियार खरीदा जाएगा।
माओवादियों ने बुधवार को इस टेप का महत्व कम करने का प्रयास करते हुए कहा कि यह भाषण पुराना और अप्रासंगिक है। अन्य बड़ी पार्टियों का मनोबल इससे ऊंचा हुआ है और नेपाली कांग्रेस तथा नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) ने कहा कि टेप से माओवादी पार्टी का दोहरा चरित्र और सत्ता की उनकी भूख उजागर हो गई है।
उधर काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रवक्ता ने कहा कि पीएलए के सदस्यों का सत्यापन संयुक्त निगरानी समन्वय समिति ने किया था। इसमें पीएलए, नेपाली सेना और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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