60 से ज़्यादा तालेबान मारे: पाक

पाकिस्तानी सेना के अनुसार स्वात घाटी में 60 से अधिक तालेबान मारे गए हैं. वहाँ से हज़ारों लोगों का पलायन जारी है और ये संख्या पाँच लाख तक पहुँच सकती है.
सेना का कहना है कि स्वात और बुनेर में उसने हथियारों से लैस हेलिकॉप्टरों और गोलाबारी का इस्तेमाल करते हुए तालेबान को निशाना बनाया है. मिंगोरा में भीषण लड़ाई हुई है.
तालेबान ने एक खदान पर कब्ज़ा कर लिया था और वहाँ 35 चरमपंथियों के मारे जाने की ख़बर है. लेकिन इसकी स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि नहीं हो पाई है.
आज की स्थिति के लिए तालेबान ही पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं. सरकार ने काफ़ी लचीलापन दिखाकर पूरे मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की है. ये सब कुछ ख़ासे अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हुआ है लेकिन स्वात में शरिया क़ानून लागू होने बाद भी तालेबान ने गश्त लगाना जारी रखा और हथियार डालने से इनकार कर दिया सूबा सरहद के सूचना मंत्री
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ग़ौरतलब है कि ये सैन्य अभियान ऐसे समय चल रहा है जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी अमरीका में राष्ट्रपति ओबामा और अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के साथ त्रिपक्षीय बातचीत के लिए वॉशिंगटन में हैं.
हज़ारों का पलायन, आरोप-प्रत्यारोप
जहाँ एक ओर सैन्य अभियान चल रहा है वहीं दूसरी ओर हज़ारों लोगों का उस इलाक़े से पलायन जारी है.
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि तालेबान के साथ हुआ शांति समझौता ख़त्म हो जाता है तो पलायन करने वाले लोगों की संख्या पाँच लाख तक पहुँच सकती है.
सूबा सरहद की सरकार के सूचना मंत्री मिंयां इफ़्तिख़ार ने कहा है, "आज की स्थिति के लिए तालेबान ही पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं. सरकार ने काफ़ी लचीलापन दिखाकर पूरे मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की है. ये सब कुछ ख़ासे अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हुआ है लेकिन स्वात में शरिया क़ानून लागू होने बाद भी तालेबान ने गश्त लगाना जारी रखा और हथियार डालने से इनकार कर दिया."
जिन लोगों को अपना घर छोड़ कर भागना पड़ा है उनका कहना है कि वे अपना सभी सामान वहीं छोड़ आए हैं और मीलों चल कर उन्हें शरणार्थी शिविरों तक पहुँचना पड़ा है.
यदि सरकार हमारे ख़िलाफ़ सैन्य अभियान चलाती है तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा जो वह लंबे समय याद रखेगी तालेबान प्रवक्ता मुस्लिम ख़ान
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उधर तालेबान के प्रवक्ता मुस्लिम ख़ान का कहना था कि स्वात के 90 प्रतिशत भू-भाग पर तालेबान का नियंत्रण है.
उनका कहना था, "यदि सरकार हमारे ख़िलाफ़ सैन्य अभियान चलाती है तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा जो वह लंबे समय याद रखेगी."
इस साल फ़रवरी में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत प्रशासन ने स्वात घाटी में शरिया क़ानून लागू करने को मंज़ूरी दी थी और तालेबान ने संघर्षविराम की हामी भरी थी.
अगस्त 2007 से लेकर इस वर्ष फ़रवरी में हुए समझौते तक तालेबान और सेना के बीच संघर्ष चलता रहा था.
समझौते के तहत तालेबान के हथियार डालने की भी बात थी लेकिन तालेबान का कहना है कि स्वात घाटी में जब तक शरिया क़ानून पूरी तरह से लागू नहीं हो जाती है वे हथियार नहीं डालेंगे.


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