बढ़ गया है राहुल गांधी का राजनीतिक कद
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। इस चुनावी फिजा ने अगर किसी नेता को कद बढ़ाने का भरपूर मौका दिया तो वह हैं नेहरू-गांधी परिवार के वारिस राहुल गांधी। इस 38 वर्षीय युवक ने देश की करोड़ों जनता का ध्यान खासतौर पर आकृष्ट किया है।
कांग्रेस पार्टी ने राहुल को भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पेश किया है। राहुल जटिलता से भरे भारतीय राजनीतिक परिदृश्य के उभरते सितारे हैं। उनके प्रशंसक कहते हैं कि राहुल में नेतृत्व के सभी गुण हैं, जबकि उनके विरोधी कहते हैं कि राहुल को देश की जमीनी हकीकत का ज्ञान नहीं है। आलोचकों के मुताबिक राहुल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह देश के नंबर एक राजनीतिक घराने से आते हैं।
यह जमीनी हकीकत है कि राहुल ने लोगों तक पहुंचने के लिए देश के कोने-कोने का दौरा किया। यहां तक कि लोगों को प्रभावित करने के मामले में उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी को भी पीछे छोड़ दिया। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यह कह चुके हैं कि राहुल में बेहतर प्रधानमंत्री बनने के सारे गुण हैं। राहुल अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में सहजता से अपनी बात रखने में सफल हैं। वह कांग्रेस का पोस्टर ब्वॉय बनने के सारे गुणों से भरपूर हैं। दिल्ली के अशोका होटल में एक प्रेस कांफ्रेंस में जिस तरीके से उन्होंने पार्टी की चुनाव बाद की रणनीति का खुलासा किया, उससे भी उनकी राजनीतिक परिपक्व ता का परिचय मिलता है। उन्होंने इस मौके पर पूरी बेबाकी के साथ मनमोहन सिंह की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर पार्टी की राय रखी।
भाजपा के रणनीतिकार अरुण जेटली राहुल को अपरिपक्व कहते हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक महेश रंगराजन का मानना है कि राहुल ने खुद को भारतीय राजनीति में 'लंबी दौड़ का धावक' साबित कर दिया है। राहुल ने जिस तरीके से भाजपा की हिंदुत्व विचारधारा पर निशाना साधा और क्षेत्रीय राजनीतिक क्षत्रपों को उनके मैदान में जाकर ललकारा, उससे भी उनकी राजनीतिक शैली का खुलासा होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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