सिख विरोधी दंगों के भुक्तभोगी पार्टी को नहीं, उम्मीदवार को तवज्जो दे रहे हैं

पश्चिमी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार महाबल मिश्रा का भाजपा उम्मीदवार जगदीश मुखी से मुकाबला पंजाबी बनाम बिहारी का चुनावी मुकाबला बन गया है। ऐसा लगता है कि यहां दलगत पहचान पर क्षेत्रीय पहचान हावी है। दंगा पीड़ित भूपिंदर कौर कहती हैं, कांग्रेस ने हमारे लिए कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। जब वर्षो से हमारी सेवा करने वाला कोई पंजाबी यहां से खड़ा हो तो हम किसी बिहारी को वोट कैसे दे सकते हैं? मैं तो भाजपा को ही वोट दूंगी।

पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में कई दंगा पीड़ित सिखों ने वर्षो से वोट नहीं दिया है। इस बार वे वोटिंग के लिए इच्छुक हैं, पर वे किसी पार्टी को तवज्जो न देकर उम्मीदवार को तवज्जो देना चाहते हैं। एक दंगा पीड़ित अमृत सिंह कहते हैं, हमारे लिए उम्मीदवार महत्वपूर्ण है, दल नहीं। हमारे परिवार में 18 मतदाता हैं और हम सभी पंजाबी समुदाय के हित में वोटिंग करेंगे। दूसरे संसदीय क्षेत्रों में भी ऐसी स्थिति है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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