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'भारतीय आईटी उद्योग पर असर नहीं'

BPO
नई दिल्‍ली। अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की नई कर नीति के अंतर्गत भारत जैसे देशों में रोजगार के अवसर पैदा करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर भारी भरकम टैक्‍स लादने की योजना है। ओबामा ने कहा, 'कंपनियां बेंगलुरू की जगह बुफालो में इकाईयां स्‍थापित करें।' इससे आईटी जगत में मंगलवार को हलचल मच गई, लेकिन सच पूछिए तो भारतीय आईटी उद्योग पूरी तरह सुरक्षित है।

अमेरिकी कंपनियों पर ज्‍यादा प्रभाव

ओबामा की नई नीति का असर भारतीय कंपनियों से ज्‍यादा अमेरिकी कंपनियों पर पड़ेगा। नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एण्‍ड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) के अध्‍यक्ष सोम मित्‍तल का कहना है कि यह अमेरिका का आंतरिक मामला है। इससे अमेरिकी कंपनियां प्रभावित होंगी, न कि भारतीय कंपनियां। उन्‍होंने कहा कि अगर आपभारतीय कंपनियों को देखें जो वहां काम कर रही हैं और टैक्‍स भी अदा कर रही हैं। इसी तरह अमेरिकी कंपनियों पर टैक्‍स लाद दिया जाएगा। इसका मतलब आउटसोर्सिंग रोकना नहीं है।

अमेरिका की आंतरिक नीति

गौरतलब है कि ओबामा की नई नीति के अंतर्गत जो अमेरिकी कंपनियां अभी तक भारत जैसे देशों में रोजगार के अवसर पैदा कर टैक्‍स में रियायतें पा रहीं थीं, वो अब खत्‍म कर दी गई हैं। ओबामा ने कहा कि अगर न्‍यूयॉर्क के बुफालो में इकाइयां स्‍थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ायेंगी, तो उन्‍हें टैक्‍स में रियायतें मिलेंगी।

नैसकॉम के एक अध्‍ययन के मुताबिक भारतीय सॉफ्टवेयर और आउटसोर्सिंग उद्योग में होने वाली कुल आय का 92 प्रतिशत एक्‍सपोर्ट से आता है। इस पर टैक्‍स विश्‍ोषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका की आंतरिक नीति है। वो बस अपने धन को अपने ही देश में रखना चाहते हैं। हालांकि यह माना जा रहा है कि ओबामा की यह नीति भले ही अमेरिका के लिए अच्‍छी हो, लेकिन इससे दुनिया भर में गलत संदेश गया है।

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