भारत के खिलाफ आरोपों से प्रचंड पलटे

काठमांडू, 6 मई (आईएएनएस)। नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' संयुक्त राष्ट्र के सत्यापन के दौरान माओवादी गुरिल्लाओं की संख्या बढ़ाकर बताने संबंधी वीडियो टेप के जारी होने से पैदा विवाद पर अपना बचाव करते हुए भारत पर लगाए आरोपों से भी पलट गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने नेपाल के बड़े दलों और भूमिगत माओवादी पार्टी के बीच 12 सूत्रीय समझौता कराने और राजा ज्ञानेंद्र का सेना समर्थित शासन समाप्त करने के लिए पहल की।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष नेपाल में संविधान सभा के ऐतिहासिक चुनाव करवाने में भी भारत ने सहयोग दिया।

प्रचंड ने कहा कि जनता में आशंका थी कि सेना प्रमुख जनरल रुकमांगद कटवाल से पार्टी के विवाद में भारत अपना समर्थन हटा कर सकता है।

प्रचंड ने कहा कि भारतीय विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा के नेपाल के आतंरिक मामलों में भारत के हस्तक्षेप के इरादे से इंकार के बयान के बाद उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार होगा और भविष्य में इनमें प्रगति होगी।

प्रचंड ने यह भी कहा कि अपने इस्तीफा भाषण में उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप के बारे में चर्चा की परंतु भारत का नाम नहीं लिया।

बहरहाल मंगलवार को जारी वीडियो में प्रचंड को यह कहते दिखाया गया कि यदि प्रतिक्रियावादी भारत और अमेरिका को यह संदेह होता कि माओवादी चुनाव जीत जाएंगे तो वे कभी भी इसे होने नहीं देते।

प्रचंड के इस्तीफे की घोषणा के बाद वित्त मंत्री बाबूराम भट्टराई ने भी कहा कि भारतीय नौकरशाही ने भारी गलती की है और इससे नेपाल में भारत विरोधी भावनाएं उभरेंगी।

माओवादी मुखपत्र 'दैनिक जनादिशा' ने पहले पóो पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कार्टून प्रकाशित किया है। प्रधानमंत्री को माओवादियों से अलग हुए उसके सहयोगियों की रैली का नेतृत्व करते हुए नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव को कंधे पर बैठा कर ले जाते हुए दिखाया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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