नेपाल में प्रधानमंत्री के बाद अब राष्ट्रपति के जाने की बारी?
काठमांडू, 5 मई (आईएएनएस)। नेपाल में सेना प्रमुख की बर्खास्तगी को लेकर उठे विवाद में सोमवार को प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' के इस्तीफे के बाद क्या नेपाल के पहले राष्ट्रपति राम बरन यादव के जाने की बारी है?
माओवादी सरकार के सेना प्रमुख जनरल रुक्मांगद कटवाल को बर्खास्त करने के बाद उनको पद पर बनाए रखने के राष्ट्रपति के फैसले के बाद 61 वर्षीय पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विवादों से घिर गए हैं। उनके इस कदम को राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकार से बाहर जाकर उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
प्रचंड ने सोमवार को उन पर सत्ता का सामानांतर केंद्र बनने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
राष्ट्रपति कार्यालय ने भी एक बयान जारी करके कहा कि संविधान का संरक्षक और सेना का सर्वोच्च कमांडर होने के नाते उनको बर्खास्त सेना प्रमुख को पद पर बहाल करने का अधिकार है।
सत्ता से बाहर माओवादी पार्टी ने राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के खिलाफ नया संघर्ष आरंभ करते हुए दोनों को हटाने की मांग की है।
राष्ट्रपति का भविष्य अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर निर्भर है जिसने मंगलवार को उनके खिलाफ सुनवाई तय की है।
नेपाल के सबसे पुराने अधिकार संगठन 'इनहर्ड इंटरनेशनल' ने सोमवार को राष्ट्रपति पर अपने न्यायाधिकार का अतिक्रमण करने का आरोप लगाते हुए मामला दायर किया था।
न्यायाधीश बलराम केसी की एकल खंडपीठ के निर्णय का नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य पर काफी महत्वपूर्ण प्रभाव होगा।
यदि न्यायालय ने पाया कि राष्ट्रपति ने एक औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष की सीमा से परे जाकर काम किया तो इसका मतलब यादव का जाना होगा।
यदि ऐसा हुआ तो माओवादी एक सर्व दलीय सरकार में शामिल होने या उसे बाहर से समर्थन देने को राजी हो जाएंगे।
यदि न्यायालय ने निर्णय दिया कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्ति की सीमा में कार्य किया है तो माओवादी अपना विरोध जारी रखेंगे। इससे शांति प्रक्रिया और संविधान निर्माण प्रक्रिया पर बहुत खराब प्रभाव पड़ेगा।
तीसरा परिदृश्य यह हो सकता है कि प्रचंड की तरह राष्ट्रपति खुद इस्तीफा देकर राजनीतिक गतिरोध दूर करने का रास्ता साफ करें।
बहरहाल सर्वोच्च न्यायालय पर फैसला छोड़कर नेपाल के सभी बड़े राजनीतिक दल काफी खुश हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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