लोकतंत्र में शरिया संभव नहीं : सूफी मुहम्मद
समाचार चैनल 'जियो टीवी' को दिए एक साक्षात्कार में तहरीक-ए-निफाज-ए-शरीयत-ए-मुहम्मदी (टीएनएसएम) के प्रमुख मौलाना सूफी मुहम्मद ने कहा कि लोकतंत्र और शरिया में काफी अंतर है।
उसने कहा कि काजी हुसैन अहमद, मौलाना फजलुर रहमान और मौलाना समीउल हक सहित कई धार्मिक नेता लोकतंत्र में ही शरिया लागू करने का रास्ता खोजने का प्रयास कर रहे हैं, जो गलत है।
सूफी ने कहा कि शरिया लागू करने के लिए वह अपना प्रयास जारी रखेंगे।
उल्लेखनीय है कि सूफी मुहम्मद ने 16 फरवरी को उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत की सरकार के साथ स्वात घाटी और मलकंद डिविजन के छह अन्य जिलों में शरिया कानून लागू करने के समझौते की मध्यस्थता की थी। इसके बदले में तालिबान को हथियार डाल देने थे।
तालिबान ने 15 अप्रैल को समझौते के अस्तित्व में आने के तुरंत बाद इसका उल्लंघन करते हुए बुनेर जिले पर कब्जा कर लिया। सुरक्षा बलों ने इसके बाद 26 अप्रैल को निचले दीर जिले और उसके बाद बुनेर में कार्रवाई की और 150 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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