प्रचंड ने छोड़ा नेपाली प्रधानमंत्री का पद (लीड-2)
लगभग आठ महीने पहले देश के प्रथम माओवादी प्रधानमंत्री बने प्रचंड ने टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान पद छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने देश के राजनीतिक दलों और विदेशी ताकतों में उनकी सरकार की राह में रोड़े अटकाने का आरोप लगाया।
इससे पहले दो माह के संघर्ष के बाद सरकार ने रविवार को सेनाध्यक्ष को उनके पद से हटा दिया था।
इस घोषणा के तत्काल बाद सरकार के सहयोगी दलों ने तीखा विरोध किया और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट (यूएमएल) और सद्भावना पार्टी ने सरकार से अलग होने का एलान किया।
इससे पहले मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस (एनसी) ने प्रचंड के इस्तीफे की मांग की थी।
पूर्व मंत्री और मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस (एनसी) के नेता प्रकाश मान सिंह ने कहा था, "दो सहयोगियों के साथ छोड़ देने के बाद माओवादियों के नेतृत्व वाली सरकार अब अल्पमत में आ गई है।"
उन्होंने कहा था कि ऐसी स्थिति में माओवादी पार्टी को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। उन्होंने कहा था कि वह प्रधानमंत्री प्रचंड से इस्तीफा मांगते हैं ताकि एक सर्वसम्मत सरकार का गठन किया जा सके।
सरकार के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल उस समय गहरा गए थे जब सोमवार को ही सत्तारूढ़ माओवादी पार्टी के चार सहयोगी दलों ने महत्वपूर्ण मंत्रिमंडलीय बैठक के बहिष्कार की घोषणा की थी।
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-युनीफाईड मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल), सद्भावना पार्टी, मधेशी जनाधिकार फोरम (एमजेएफ) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (युनाइटेड) ने इससे बाहर रहने का फैसला किया।
यूएमएल के पहले ही इस बैठक में भाग लेने की संभावना नहीं थी कि क्योंकि उसने रविवार को ही घोषणा कर दी थी कि माओवादी पार्टी द्वारा सेना प्रमुख रुक्मांगद कटवाल को हटाने का एकपक्षीय निर्णय लेने के बाद वह सरकार से बाहर हो रही है।
यूएमएल के मंत्रियों द्वारा इस्तीफा दिए जाने तुरंत बाद सद्भावना पार्टी ने भी गठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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