सेनाध्यक्ष के बाद अब नेपाल के राष्ट्रपति सत्तारूढ़ माओवादियों के निशाने पर

काठमांडू, 4 मई (आईएएनएस)। नेपाल में सेना प्रमुख जनरल रुक्मांगद कटवाल के बाद अब राष्ट्रपति राम बरन यादव माओवादियों के निशाने पर हैं। सत्तारूढ़ माओवादी पार्टी और उसके सहयोगियों ने उन पर असंवैधानिक दखलंदाजी का आरोप लगाया है।

यादव ने सेना प्रमुख को हटाने के सत्तारूढ़ माओवादी पार्टी के फैसले पर मुहर लगाने से इंकार करके उसकी नाराजगी मोल ले ली है। रविवार मध्य रात्रि में यादव ने सेना मुख्यालय को एक पत्र भेजकर बर्खास्त सेना प्रमुख से अपने पद पर बने रहने को कहा था।

राष्ट्रपति ने अपने पत्र की एक प्रति प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' को भी भेजी थी जिन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। ठीक इसी तरह सेना प्रमुख ने भी जबरन सेवानिवृत्ति का पत्र लेने से इंकार कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि पत्र लेकर गए राष्ट्रपति के दूत ने प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर करीब आधे घंटे तक प्रतीक्षा की और उसके बाद बिना पत्र सौंपे वापस लौट गया।

माओवादियों ने यादव पर आरोप लगाया है कि वह भी पूर्व शासक ज्ञानेंद्र की भांति सत्ता पलट की कोशिश कर रहे हैं।

माओवादी नेता और देश के वित्त मंत्री बाबूराम भट्टराई ने कहा, "राष्ट्रपति तो औपचारिक प्रमुख होता है जिसके पास कोई ताकत नहीं होती। राष्ट्रपति का यह कदम संसद, चुनी हुई सरकार और नेपाली जनता के खिलाफ है।"

माओवादी नेताओं ने सोमवार को मुलाकात कर इस बात पर विचार किया कि क्या राष्ट्रपति पर अंतरिम संसद में महाभियोग चलाया जाए?

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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