संसद में बिना बहस के पारित हो जाते हैं कई विधेयक

संसदीय बहस को मजबूत करने के लिए काम करने वाली संस्था 'पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च' के अध्ययन के मुताबिक 14वीं लोकसभा के अंतिम दिन केवल 17 मिनट के दौरान आठ विधेयक पारित किए गए।

अध्ययन में कहा गया है, "वर्ष 2008 के दौरान संसद ने वित्त व विनियोग से संबंधित 32 विधेयक पारित किए। इसमें से कई विधेयक बिना बहस के पारित हुए। इतना ही नहीं पिछली लोकसभा के अंतिम दिन 17 मिनट में आठ विधेयक पारित किए गए।"

अध्ययन के मुताबिक इनमें से 28 प्रतिशत विधेयक 20 मिनट से कम बहस के बाद पारित किए गए जबकि 19 प्रतिशत विधेयक पर एक घंटे से कम समय तक बहस किए गए।

इस बारे में विपक्षी सांसदों का कहना है कि सरकार ने जल्दबाजी में काम किया।

लोकसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उपनेता सी. के. चंद्रप्पान ने कहा, "बिना किसी चर्चा के विधेयक पारित करना ठीक चलन नहीं है। अधिकत्तर मामलों में विधेयक पारित कराने के लिए सरकार जल्दबाजी में रहती है।"

हालांकि संसदीय कार्य मंत्री व्यालार रवि का कहना है कि संसद का एक महत्वपूर्ण काम विधेयक पास करना भी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश समय विभिन्न मुद्दों पर संसदीय कार्य बाधित होती है ऐसे में सरकार के पास समय नहीं रहता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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