मनमोहन हुए नरम, लेकिन वामपंथी अभी भी गरम (राउंडअप)
कोलकाता के एक समाचार पत्र आनंद बाजार पत्रिका के साथ एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य को अपना निजी मित्र बताया।
उन्होंने कहा, "सरकार गठन को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ कोई समझौता हो सकता है। राजनीति में स्थायी मित्र और शत्रु नहीं होते।"
उधर, पार्टी महासचिव राहुल गांधी ने एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार में संकेत किया कि अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते को निरस्त करने की शर्त पर किसी भी पार्टी के साथ चुनाव बाद समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मनमोहन सिंह पर भी कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
राहुल ने कहा, "मनमोहन सिंह हमारे उम्मीदवार हैं। जिस तरह से हम परमाणु समझौते के मामले में अटल बने रहे, उसी तरह मनमोहन सिंह पर भी कोई समझौता नहीं कर सकते।"
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणाम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कुछ खास मुद्दों के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।
लेकिन यहीं पर वामपंथियों के प्रति नरम रुख अख्तियार करते हुए राहुल ने कहा, "मैं नहीं समझता कि वामपंथी पार्टियां परमाणु समझौते को विश्वासघात के रूप में लेती होंगी। यह अलग बात है कि उनके अपने विचार हैं और हमारे अपने विचार हैं।"
लेकिन वामपंथियों पर कांग्रेस के इन दो दिग्गजों का कोई जादू नहीं चल पाया है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता एस.सुधाकर रेड्डी ने कहा, "हम परमाणु समझौते को देश के साथ विश्वासघात के रूप में लेते हैं।"
उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने देश की जनता के साथ विश्वासघात किया है। उसने नेहरू युग की विदेश नीति के साथ विश्वासघात किया है। उसने परमाणु समझौता कर न्यूनतम साझा कार्यक्रम के साथ विश्वासघात किया है।"
रेड्डी ने कहा, "ऐसे में कांग्रेस को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता।"
लेकिन मनमोहन सिंह ने कहा, "अभी चुनाव परिणाम तो आ जाने दीजिए। चुनाव के दौरान तो इस तरह की बातें होना स्वाभाविक हैं।"
इसी बीच, राहुल गांधी ने कहा है कि चुनाव में उनकी पार्टी का प्रदर्शन पहले से बेहतर होगा।
उन्होंने पूरे भरोसे से कहा है, "हम अपनी सीट संख्या बढ़ाएंगे। हम जीतेंगे और सरकार बनाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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