न्यायाधीश को रिटायर्ड नहीं किया जाना चाहिए : लाहोटी
ग्वालियर में सेवा निवृत्त न्यायाधीशों के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति लाहोटी ने कहा कि जज को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन दी जाती है जबकि जरूरत पूरे वेतन की होती है। उनका मानना है कि 62 वर्ष में जब न्यायाधीश को सेवा निवृत्त किया जाता है तब वह पूरी तरह परिपक्व होता है। इसलिए उसके अनुभव का लाभ लिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति लाहोटी ने अमेरिका का जिक्र करते हुए कहा कि वहां न्यायाधीशों की पूर्णकालिक नियुक्ति होती है अर्थात उन्हें सेवा निवृत्त नहीं किया जाता। यही व्यवस्था भारत में भी लागू की जाना चाहिए। न्यायमूर्ति लाहोटी ने कहा कि वह अन्य क्षेत्रों में भी वरिष्ठजनों के अनुभव का लाभ लिए जाने के पक्ष में है।
न्यायमूर्ति लाहोटी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के बीच एक निश्चित दूरी जरूरी है। यह दूरी लोकतंत्र को जिन्दा रखने के लिए आवश्यक भी है। उनका मानना है कि अगर तीनों स्तंभ करीब आकर एक दूसरे में घुल-मिल गए तो उन्हें किसी की खामी नजर नहीं आएगी और यह स्थिति लोकतंत्र के लिए घातक होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications