सेना प्रमुख को बर्खास्त करने के बाद नेपाल सरकार का भविष्य अधर में (राउंडअप)
काठमांडू, 3 मई (आईएएनएस)। नेपाल की सत्तारूढ़ माओवादी पार्टी ने सेना में हस्तक्षेप न करने की भारत की सलाह दरकिनार करते हुए रविवार को सेनाध्यक्ष जनरल रूक्मांगद कटवाल को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद राजधानी काठमांडू में हिंसा और अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है, जबकि गठबंधन सहयोगी सरकार से अलग होने पर विचार कर रहे हैं।
माओवादी प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने 61 वर्षीय कटवाल के स्थान पर माओवादियों के नजदीकी माने जाने वाले वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल कुल बहादुर खादका को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया है। कटवाल तीन महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे।
नेपाल के सूचना एवं प्रसारण मंत्री कृष्णबहादुर महरा ने रविवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकार के इस निर्णय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार के तीन आरोपों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहने पर मंत्रिमंडल ने सेना प्रमुख को हटाने का फैसला किया।
इससे पहले सत्तारूढ़ नेपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के फैसले से असहमत गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों ने मंत्रिमंडल की बैठक का बहिष्कार किया।
सरकार ने पिछले महीने सेना प्रमुख से पूछा था कि सरकार की रोक के बावजूद वह क्यों नए सैनिकों की भर्ती जारी रखे हुए हैं और आठ ब्रिगेडियर जनरलों की सेवानिवृत्ति के निर्णय को क्यों न्यायालय में चुनौती दी गई। पिछले महीने माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के राष्ट्रीय खेलों के हिस्सा लेने के सरकार के फैसले के विरोध में सेना की खेलों से हिस्सेदारी वापस लेने के निर्णय पर भी उनसे सवाल किया गया था।
पिछले 15 दिनों में भारत ने नेपाल में अपने राजदूत राकेश सूद को चार बार प्रचंड से मिलने और यह कहने के लिए भेजा कि वह सेना प्रमुख के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई न करें।
परंतु माओवादी पार्टी ने पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों के विरोध के बावजूद कटवाल को बर्खास्त कर दिया।
इस फैसले के बाद नेपाल सेना के मुख्यालय में एक आपात बैठक हुई जबकि राष्ट्रपति रामबरन यादव के कार्यालय में उच्च सतर्कता की घोषणा की गई है। माओवादी राष्ट्रपति पर सेना प्रमुख की बर्खास्तगी को रोकने और राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्रयास करने का आरोप लगा रहे हैं।
गठबंधन सरकार में शामिल सहयोगी पार्टियों-नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल), मधेशी जनाधिकार फोरम (एमजेएफ), सद्भावना पार्टी और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड) ने माओवादियों के इस फैसले से दूरी बना ली है। इन दलों ने कहा कि उन्होंने माओवादियों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से मना किया था।
सहयोगी दलों के इस फैसले से भयभीत माओवादी अपनी सरकार के सहारे के लिए छोटे दलों का सहयोग खोज रहे हैं।
बहरहाल सभी प्रमुख संसदीय दल मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के झंडे के नीचे एकजुट होने लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने सेना प्रमुख की बर्खास्तगी के फैसले का विरोध करते हुए राष्ट्रपति रामबरन यादव से मंत्रिमंडल के फैसले को खारिज करने को कहा है।
यादव जो पहले से ही माओवादियों को आम सहमति से काम करने को कहते रहे हैं, ने प्राप्त सूचना के अनुसार मंत्रिमंडल के इस निर्णय को 'असंवैधानिक' करार दिया है।
कानूनी पत्रकार और लेखक अनंत लुईटेल ने कहा कि संविधान में कहा गया है कि सेना से संबंधित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएंगे। आम सहमति न होने पर राष्ट्रपति मंत्रिमंडल के निर्णय को रोक सकते हैं। वह सर्वोच्च न्यायालय की सलाह के लिए या पुनर्विचार के लिए इसे अंतरिम संसद के पास भेज सकते हैं।
यदि राष्ट्रपति ने इसे संसद के पास भेजा तो मंत्रिमंडल के निर्णय पर फैसला वोट से होगा। संसद में माओवादी पार्टी के पराजित होने की संभावना है।
माओवादी पार्टी ने सेना प्रमुख की बर्खास्तगी का विरोध करने पर राष्ट्रपति को हटाने की धमकी दी है लेकिन लुईटेल के अनुसार यह कानूनी रूप से असंभव है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को केवल महाभियोग के जरिए संसद के दो-तिहाई बहुमत से हटाया सकता है। माओवादी उन्हें अकेले नहीं हटा सकते।
नेपाली कांग्रेस द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक के समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
माओवादियों को छोड़कर इस बैठक में सभी 24 संसदीय पार्टियां हिस्सा ले रही हैं। बैठक में एक वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावना पर भी चर्चा होगी।
इन घटनाओं के बीच राजधानी काठमांडू में हिंसा भड़क उठी,जब सेना प्रमुख की बर्खास्तगी की खुशी मनाने के लिए सड़कों पर निकले हजारों माओवादियों और माओवादियों के अधिनायकवादी रवैए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले नेपाली कांग्रेस के सदस्यों के बीच टकराव शुरू हो गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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