मतदान के लिए आज भी बरकरार है 127 वर्षीय भदरू का उत्साह
जुग्गर , 3 मई (आईएएनएस)। भदरू 127 वर्ष के हैं। शिमला से 60 किलोमीटर दूर हिमालय की बर्फीली वादियों में बसे जुग्गर गांव में लकड़ी के बने एक मकान में वह रहते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी मतदान को लेकर उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।
उन्होंने राजा महाराजाओं और ब्रिटिश शासन से लेकर महात्मा गांधी का दौर भी देखा और अब आजकल के राजनेताओं को देख रहे हैं। राजनीति के मौजूदा दौर से वह प्रभावित नहीं हैं। यह लोकतंत्र का ही तकाजा है कि इसके बावजूद मतदान को लेकर उनके उत्साह में अभी तक कोई कमी नहीं आई है।
वह आईएएनएस से बातचीत में कहते हैं, "राजा महाराजाओं को दौर सबसे बढ़िया था क्योंकि वे आम आदमी का ख्याल रखते थे। आज तो सरकारें स्वार्थी होती हैं। वह अमीरों का ही ध्यान रखती है। हर पांच साल बाद चुनाव क्यों होते हैं जबकि इससे किसी आम आदमी का भला नहीं होता।"
उन्होंने कहा, "आप इन सड़कों को ही देख लीजिए। पानी के लिए लोग हर रोज एक दूसरे से झगड़ते हैं। गर्मी बढ़ने लगी है यहां। पहाड़ और पेड़ पौधे ता बचे ही नहीं। सब कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो चुका है। इस साल तो यहां बारिश भी नहीं हुई। मैंने अपने जीवन में कभी सूखा नहीं देखा था। हम दशकों पहले जैसे थे आज भी वैसे ही हैं।"
उम्र के चलते उनकी आंखों की रोशनी धुंधला गई है और शरीर कमजोर हो गया है। लेकिन इसके बावजूद वह कहते हैं, "इस बार भी मैं अपने मताधिकार का प्रयोग करूंगा।"
देश में 1952 में हुए पहले आम चुनाव में भी उन्होंने मतदान किया था। अभी भी उनके मन में पहले चुनाव की यादें ताजा हैं। वह कहते हैं, "उस समय मैंने पंडित जवाहरलाल नेहरू की पार्टी को अपना मत दिया था।"
मौजूदा दौर की राजनीति की जड़ में समा चुके भ्रष्टाचार पर दु:ख प्रकट करते हुए भदरू कहते हैं, "भ्रष्टाचार तो जीवन की पद्धति में शुमार हो गया है। स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने कभी नहीं सोचा था कि पैसों के दम पर भी देश में कभी राजनीति हावी हो जाएगी। आज तो नीतियों के नाम पर शायद ही कोई पार्टी वोट मांगती हो।"
शिमला संसदीय सीट पर 13 मई को मतदान होना है। भदरू कसुम्पति विधानसभा के मतदान संख्या 35 पर वह मतदान करेंगे। उनकी पहचान पत्र संख्या 226 है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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