पाकिस्तान में तालिबान की मांग पर इस्लामी अपीली अदालत के गठन की घोषण
प्रांत के मलकंद डिविजन में इस्लामी शरिया कानून लागू करने के लिए नियुक्त न्यायाधीशों के फैसलों के खिलाफ 'दार-उल-कजा' अदालत में अपील की जा सकेगी।
प्रांत के सूचना और प्रसारण मंत्री मियां इफ्तिखार हुसैन ने शनिवार को पेशावर में कहा कि दार-उल-कजा के गठन की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई है, इसलिए अब हथिायार उठाए रहने का कोई तर्क नहीं है।
हुसैन ने कहा कि सरकार के पास हथियारबंद लोगों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार होगा और ऐसे लोगों को विद्रोही माना जाएगा। यहां तक कि उनके अंतिम संस्कार पर प्रार्थना भी गैर इस्लामी होगी।
उधर सरकार के साथ फरवरी में तालिबान की ओर से समझौते में मध्यस्थता करने वाले कट्टरपंथी मौलाना सूफी मुहम्मद ने इस घोषणा पर ठंडी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे एकतरफा घोषणा बताया।
जियो टीवी ने सूफी के प्रवक्ता अमीर इजात खान के हवाले से कहा कि वे सरकार से दूसरे दौर की वार्ता के लिए बुलावे का इंतजार करते रहे लेकिन उनसे संपर्क नहीं किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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