बुद्धदेव अच्छे मित्र पर ना जाने करात को क्या हो गया है : मनमोहन
प्रधानमंत्री ने प्रमुख बांग्ला अखबार 'आनन्द बाजार पत्रिका' को दिए साक्षात्कार में कहा, "सरकार बनाने के लिए संप्रग और वाम दलों में समझौता हो सकता है। राजनीति में कोई स्थायी मित्र और शत्रु नहीं होता।"
उन्होंने कहा, "सभी धर्मनिरपेक्ष दलों की प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से दूर रखना है। इसलिए साम्प्रदायिक तत्वों को सत्ता से दूर रखने के लिए वामपंथी दल सरकार बनाने की प्रक्रिया में हिस्सेदारी कर सकते हैं।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात के बार-बार यह कहने कि राज्यसभा के किसी सदस्य को बतौर प्रधानमंत्री वामपंथी दल समर्थन नहीं देंगे को मनमोहन सिंह ने अनावश्यक और निर्थक करार दिया।
उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि वह ऐसा क्यों कह रहे हैं। इस प्रकार की बातें अनावश्यक और निर्थक है।"
उन्होंने कहा कि वयोवृद्ध मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। दिवंगत हरकिशन सिंह सुरजीत के साथ भी उनके अच्छे रिश्ते थे। उन्होंने कहा, "पर मैं नहीं जानता कि करात क्यों ऐसा बर्ताव कर रहे हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "चुनाव के दौरान हालांकि इस प्रकार की बयानबाजियां होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। देखते हैं चुनाव बाद क्या होता है।"
उन्होंने कहा कि वैसे भी सिर्फ परमाणु करार को लेकर उठे विवाद को छोड़ दिया जाए तो वामदलों के साथ काम करने का उनका अनुभव खराब नहीं रहा है ।
मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "वह मेरे अच्छे मित्र हैं। उनके बारे में मेरी राय में कोई तब्दीली नहीं आई है। इसके साथ ही मैं उनकी आलोचना करने से भी नहीं हिचकिचाऊंगा क्योंकि उनकी सरकार ने गरीबों के हितों को नजरअंदाज किया है।"
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, "मैं चाहूंगा कि ममता मेरे कैबिनेट में सहयोगी बने। पहले भी वह मंत्री रह चुकी हैं और उनका प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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