कोई भी देशभक्त पार्टी परमाणु समझौते को निरस्त नहीं करेगी : प्रधानमंत्री (राउंडअप)
समाचार चैनल 'सीएनएन-आईबीएन' के साथ एक विस्तृत साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने इस बात का भी खुलासा किया कि भारत, पाकिस्तान के साथ एक शांति समझौता करने के करीब पहुंच चुका था, लेकिन तब तक वहां वकीलों का आंदोलन शुरू हो गया और वह समझौता नही हो सका। इसी साक्षात्कार में मनमोहन सिंह ने यह भी कहा है कि वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान किसी भी समय किसी युवा को सत्ता सौंपना पसंद करेंगे।
मनमोहन सिंह ने बोफोर्स दलाली मामले के आरोपी ओतावियो क्वात्रोची के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस वापस लिए जाने का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि दुनिया कहती है कि क्वात्रोची के खिलाफ भारत में कोई मामला ही नहीं है।
सिंह ने स्वीकार किया, "वामदलों के साथ काम करने में मुझे मजा आया। व्यक्तिगत रूप से मैं वामदलों के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन यह परमाणु समझौता निरस्त करने की कीमत पर नहीं होगा।"
उन्होंने कहा, "परमाणु समझौता बहुत मेहनत के बाद संभव हुआ है। हमने भारत का परमाणु अलगाव खत्म किया है। मैं नहीं समझता कि कोई भी गंभीर और देशभक्त पार्टी इस समझौते का विरोध करेगी।"
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2004 में शपथ ग्रहण करने के केवल 48 घंटे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें बताया था कि प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें चुना गया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह अगला कार्यकाल भी पूरा करना चाहेंगे या बीच में ही किसी को (राहुल गांधी को) सत्ता सौंप देंगे, इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने कहा है कि राहुल गांधी में वे सभी खूबियां हैं जो एक प्रधानमंत्री में होनी चाहिए। मैं निश्चित ही किसी समय युवा को सत्ता सौंपना चाहूंगा।"
यह पूछे जाने पर कि पिछले कार्यकाल में कोई ऐसा काम, जिसे न कर पाने का उन्हें पछतावा हो और उसे वह दूसरे कार्यकाल में करना चाहेंगे, उन्होंने उत्तर दिया, "मैं कृषि, शिक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य पर काम करना चाहता हूं।"
बोफोर्स दलाली के संदिग्ध ओतावियो क्वात्रोची के मामले में उन्होंने कहा, "क्वात्रोची का मामला भारत सरकार के लिए शर्मनाक साबित हुआ है। हमने क्वात्रोची को मलेशिया से लाने की कोशिश की है। हमने उसे अर्जेटीना से लाने की कोशिश की है। हम विफल साबित हुए। अदालत कहती है कि हमारे पास उसके खिलाफ कोई मजबूत मामला ही नहीं है।"
सिंह ने कहा कि यह मामला देश की न्याय व्यवस्था की अच्छी छवि प्रस्तुत नहीं करता।
प्रधानमंत्री ने कहा, "देश की न्याय व्यवस्था के लिए यह अच्छी बात नहीं है कि हम लोगों को तंग करें, जबकि दुनिया कहती है कि कोई मामला ही नहीं है। इंटरपोल ने भारत सरकार से पूछा था कि क्वात्रोची को हम रेड कार्नर नोटिस के दायरे में क्यों लाना चाहते हैं।"
सिंह ने आगे कहा, "उसके बाद मामला कानून मंत्रालय के पास भेजा गया और उसके बाद उसे महान्यायवादी के पास भेजा गया। महान्यायवादी ने सलाह दी कि रेड कार्नर नोटिस के लायक यह मामला नहीं है। हालांकि तभी से यह मामला अदालत में भी लटका हुआ है।"
प्रधानमंत्री ने शनिवार को इस बात का भी खुलासा किया कि वह दो वर्ष पहले पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ सभी द्विपक्षीय मसलों पर एक समझौता करने के करीब पहुंच चुके थे, लेकिन तब तक पाकिस्तानी न्यायपालिका ने उस प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं और मुशर्रफ सभी समस्याओं के गैर भूक्षेत्रीय समाधान के लिए एक समझौते के करीब पहुंच चुके थे। लेकिन तभी प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी के साथ वह कठिनाइयों में उलझ गए। उसके बाद उन्होंने कहा कि हम हर मोर्चो पर नहीं लड़ सकते और उसके बाद पूरी प्रक्रिया रुक गई।"
उसके बाद पिछले वर्ष मुंबई हमले के बाद तो भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई।
मनमोहन सिंह ने आगे कहा, "मैं अब भी मानता हूं कि पाकिस्तान के प्रति हमारी कोई दुर्भावना नहीं है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान तालिबान को पराजित करे। हमारी एक मात्र चिंता यह है कि पाकिस्तान को अपनी धरती से हमारे देश (भारत) में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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