मध्य प्रदेश के 2608 मतदाताओं को नहीं भाया कोई उम्मीदवार
इस बार के लोकसभा चुनाव में नेताओं के प्रति मतदाताओं में गुस्सा साफ नजर आया और उन्होंने अपनी इस नाराजगी का खुलासा भी किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय मिली जानकारी के मुताबिक ये मतदाता मतदान केन्द्रों तक पहुंचे, उन्होंने अंगुली में स्याही लगवाई और रजिस्टर में नाम भी दर्ज करावाया, लेकिन वोट किसी को भी नहीं दिया। चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं के संदर्भ में जानकारी रखने की व्यवस्था की है।
मतदान केन्द्रों पर पहुचने के बाद भी वोट न डालने वाले इन मतदाताओं का इसलिए हिसाब रखा जाता है ताकि कोई मतदाता शिकायत दर्ज न करा सके। यह व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व कानून 1962 में की गई है और इसे 49 -ओ नाम दिया गया है।
प्रदेश में तृतीय चरण के दौरान 16 संसदीय क्षेत्रों में मतदान हुआ है, जहां कुल 231 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक 16 संसदीय क्षेत्रों में 2608 ऐसे मतदाता है, जिन्होंने किसी भी उम्मीदवार को वोट न देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। श्योपुर में पांच, भिन्ड में छह, ग्वालियर में 476, दतिया में छह, शिवपुरी में सात, गुना में चार, अशोक नगर में आठ, सीहोर में एक, खंडवा में दो, बुरहानपुर में दो, खरगोन में आठ, झाबुआ में छह, धार में सात, सागर में 402, छतरपुर में 337, दमोह में 149, इन्दौर में 178, उज्जैन 175, टीकमगढ़ में 14, राजगढ़ में 24, देवास में 10, रतलाम में 12 और मंदसौर में 14 मतदाताओं ने मतदान केन्द्र पर पहुंचकर भी अंतिम समय में वोट न डालने का निर्णय लिया।
दूसरे चरण के दौरान 23 अप्रैल को जिन 13 संसदीय क्षेत्रों में मतदान हुआ था वहां भी 1473 मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग कर किसी को वोट नहीं दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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