पाक में ब्लॉगरों ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोला
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। हाल ही में जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान मामलों के अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक की मुलाकात इस्लामाबाद में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से हुई थी तो जरदारी ने हॉलब्रुक से कहा था कि उनका देश 'अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है'। जरदारी ने यह बात तालिबान के संदर्भ में कही थी। ठीक ऐसी ही बात इन दिनों पाकिस्तानी ब्लॉगर भी कर रहे हैं।
'पाक ब्लॉगिंग डॉट कॉम' पर फारुख सलीम नाम के ब्लॉगर ने टिप्पणी की है कि 'हमें अब पाकिस्तान का निर्माण करना है'। तालिबान के बढ़ते कदम पर चिंता जताते हुए सलीम ने लिखा है, "पाकिस्तान में कुल भूखंड के 11 फीसदी हिस्से पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है। ऐसे समय में पाकिस्तानी सेना क्या कर रही है?"
मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए सलीम ने लिखा कि स्वात घाटी में 5,000 वर्ग किलोमीटर तालिबान के कब्जे में है। उनका कहना है तालिबान के खिलाफ सेना को सख्त कदम उठाना चाहिए ताकि पाकिस्तान को फिर मजबूती से खड़ा किया जा सके।
पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बुनेर इलाके में तालिबान की उपस्थिति पर भी ब्लॉगर समुदाय चिंतित है। बुनेर देश की राजधानी इस्लामाबाद से केवल 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 'नो रनी एग्स' नामक ब्लॉग पर टिप्पणी है कि बुनेर में तालिबान की उपस्थिति इस्लामाबाद की ओर इशारा कर रही है। ब्लॉगर ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर भी चिता जाहिर की है।
ब्लॉगर के अनुसार तालिबान स्वात घाटी से बाहर पूरे पश्चिमोत्तर क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 2009 के आरंभ में पाकिस्तान सरकार और तालिबान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत स्वात घाटी में शारिया कानून लागू किया जाना था।
'फ्री स्पीच' नामक सामुदायिक ब्लॉग का मानना है कि तालिबान के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सूफीवाद जरिया हो सकता है। 'सूफीवाद बनाम तालिबान' शीर्षक से डी.हसन नाम के ब्लॉगर ने अपने विचार रखे हैं। हसन का मानना है कि सूफीवाद सदियों से अस्तित्व में है, जबकि तालिबान हाल ही में पैदा हुआ है।
हसन ने टिप्पणी की, "तालिबान की तरह सूफीवाद भी कोई पंथ नहीं है। यह एक गैर राजनीतिक और अहिसक आंदोलन है, जो धर्म को समर्पित है। इसलिए मेरा मानना है कि तालिबान के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सूफीवाद एक जरिया हो सकता है।"
पाकिस्तान में इस प्रकार के कई ब्लॉग तालिबान के खिलाफ और उसके प्रभाव को समाप्त करने के लिए टिप्पणी कर रहे हैं और तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोलने में जुटे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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