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क्या है स्वाइन फ्लू?

नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। दुनियाभर में खौफ का पर्याय बन चुकी बीमारी स्वाइन फ्लू के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह महामारी का रूप ले सकती है लेकिन आम लोगों को अभी भी इस बीमारी के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है।

दरअसल स्वाइन फ्लू सुअरों में होने वाला सांस संबंधी एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो कई स्वाइन इंफ्लुएंजा वायरसों में से एक से फैलता है। आमतौर पर यह बीमारी सुअरों में ही होती है लेकिन कई बार सुअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल सकती है। बलगम और छींक के सहारे मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकती है।

आमतौर पर यह बीमारी एच1एन1 वायरस के सहारे फैलती है लेकिन सुअर में इस बीमारी के कुछ और वायरस (एच1एन2, एच3एन1, एच3 एन2) भी होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सुअर में एक साथ इनमें से कई वायरस सक्रिय होते हैं जिससे उनके जीन में गुणात्मक परिवर्तन हो जाते हैं।

माना जाता है कि स्वाइन फ्लू का वायरस एच1एन1 उन वायरसों का पूर्ववर्ती है जिनके कारण वर्ष 1918-1919 में स्पेन में स्पेनिश फ्लू की महामारी फैली थी जिसमें भारी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

स्वाइन फ्लू के लक्षण आम फ्लू की तरह ही होते हैं जिनमें बुखार, बलगम, गले में दर्द, शरीर में दर्द, सरदर्द, ठंड व थकान तथा उल्टी-दस्त आदि शामिल हैं।

आम धारणा है कि इस बीमारी के फैलने के बाद सुअर का मांस खाना बंद कर देना चाहिए लेकिन यदि उसे भलीभांति पकाया जाए तो इस बीमारी के फैलने की आशंका कम रहती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बचने के लिए मांस को कम से कम 70 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पकाना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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