सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालतों के गठन का आदेश दिया (लीड-2)

नई दिल्ली/अमहदाबाद, 1 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई राज्य में ही कराने और इन्हें जल्द से जल्द निपटाने के लिए राज्य सरकार को छह विशेष त्वरित अदालतों का गठन करने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने का आदेश दिया है। दंगा पीड़ितों और इन मामलों से जुड़े वकीलों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तथा अन्य की ओर से इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरिजित पसायत और न्यामूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने वर्ष 2002 में बहुचर्चित गोधरा कांड के बाद राज्य में भड़के दंगों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण मामलों में शुक्रवार को यह व्यवस्था दी।

पीठ ने इन मामलों की सुनवाई के लिए अहमदाबाद के नरोदा पाटिया, नरोदा गाम और गुलबर्ग सोसायटी तथा मेहसाणा, साबरकांठा, आणंद और साबरमती जेल में छह विशेष त्वरित अदालतों के गठन का आदेश जारी किया।

न्यायालय ने सरकार से वरिष्ठ और अनुभवी वकीलों को सरकारी वकील नियुक्त करने का भी आदेश दिया। यह नियुक्तियां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आर. के. राघवन की अध्यक्षता में गठित एक विशेष जांच पैनल की सलाह से की जाएंगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने इन मामलों की सुनवाई के लिए वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने को भी कहा है। अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि वह खुद वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करें।

अदालत ने इसके अलावा राज्य सरकार से इन मामलों से जुड़े गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। इन गवाहों को किस स्तर की सुरक्षा दी जाएगी यह विशेष जांच पैनल के प्रमुख राघवन तय करेंगे।

अहमदाबाद में गुजरात दंगों के पीड़ितों व उनके वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया है।

शहर के बाहरी क्षेत्र में बसे नरोदा पाटिया के लोगों को जैसे ही अदालत के फैसले की जानकारी मिली, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। नरोदा पाटिया में एक मार्च, 2002 को कम से कम 95 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

दंगों के दौरान मौत के मुंह से बच निकले 50 वर्षीय अब्दुल गफ्फार गनी ने कहा, "दंगा पीड़ितों के लिए यह बहुत ही राहत वाली खबर है। कई ऐसे दंगा पीड़ित हैं जिन्हें पिछले सात सालों में अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।"

सिलाई का काम करने वाले 35 वर्षीय सलीम रज्जाक ने कहा, "हमें पूरी उम्मीद है कि इन मामलों की तेजी से और निष्पक्ष सुनवाई होगी।"

इस बीच दंगों की सुनवाई से जुड़े वकीलों ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। सरकारी वकील जे. एम. पांचाल ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है।"

पीड़ितों के वकील मुकुल सिन्हा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया दिया है जो स्वागत योग्य है।

उल्लेखनीय है कि गुजरात दंगों में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे। मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इस मामले में आरोपी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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