गुजरात दंगों के पीड़ितों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया
शहर के बाहरी क्षेत्र में बसे नरोदा पाटिया के लोगों को जैसे ही अदालत के फैसले की जानकारी मिली, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। नरोदा पाटिया में एक मार्च, 2002 को कम से कम 95 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।
दंगों के दौरान मौत के मुंह से बच निकले 50 वर्षीय अब्दुल गफ्फार गनी ने कहा, "दंगा पीड़ितों के लिए यह बहुत ही राहत वाली खबर है। कई ऐसे दंगा पीड़ित हैं जिन्हें पिछले सात सालों में अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।"
सिलाई का काम करने वाले 35 वर्षीय सलीम रज्जाक ने कहा, "हमें पूरी उम्मीद है कि इन मामलों की तेजी से और निष्पक्ष सुनवाई होगी।"
इस बीच दंगों की सुनवाई से जुड़े वकीलों ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। सरकारी वकील जे. एम. पंचाल ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है।"
पीड़ितों के वकील मुकुल सिन्हा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया दिया है जो स्वागत योग्य है।
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को वर्ष 2002 के बहुचर्चित गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के दंगों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई राज्य से बाहर हस्तांतरित करने की मांग खारिज करते हुए राज्य सरकार को गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तथा अन्य की ओर से इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यामूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने यह व्यवस्था दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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