गुजरात दंगों की सुनवाई राज्य से बाहर नहीं : सर्वोच्च न्यायालय (लीड-1)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तथा अन्य की ओर से इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यामूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने यह व्यवस्था दी।

पीठ ने इन मामलों की सुनवाई के लिए गुजरात में ही छह विशेष त्वरित अदालतों के गठन का आदेश जारी किया।

इन त्वरित अदालतों को गठन अहमदाबाद के नरोदा पाटिया, नरोदा गाम, गुलबर्ग और मेहसाना, साबरकांठा, आणंद और साबरमती जेल में किया जाएगा। न्यायालय ने सरकार से वरिष्ठ और अनुभवी वकीलों को सरकारी वकील नियुक्त करने का आदेश दिया है। यह नियुक्तियां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आर. के. राघवन की अध्यक्षता में गठित एक विशेष जांच पैनल की सलाह से की जाएंगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने इन मामलों की सुनवाई के लिए वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने को भी कहा है। साथ ही अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि वह खुद वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करें।

अदालत ने राज्य सरकार से इन मामलों से जुड़े गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। इन गवाहों को किस स्तर की सुरक्षा दी जाएगी यह विशेष जांच पैनल के प्रमुख राघवन तय करेंगे।

उल्लेखनीय है कि गुजरात दंगों में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे। मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इस मामले में आरोपी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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