कराची में हिंसा, बीस लोग मारे गए

पाकिस्तान के कराची में दो गुटों के बीच हुई हिंसा में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं. वहाँ उर्दू भाषी और पश्तून लोगों के बीच तनाव बढ़ा है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि शहर के विभिन्न हिस्सों में वाहनों को आग लगा दी गई.
सिंध प्रांत की सरकार के एक मंत्री ने आपराधिक तत्वों को हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि ये शहर सांप्रदायिक हिंसा और तनाव पैदा करने के मकसद से ये हिंसा हुई है.
पिछले कई सालों में कराची में उर्दू भाषी और वहाँ बसे पश्तून लोगों के बीच तनाव और हिंसा की घटनाएँ होती रही हैं. कराची में उर्दू भाषी लोगों की ख़ासी संख्या है और ये वो लोग हैं जो भारत और पाकिस्तान की आज़ादी के समय उत्तर भारत से पाकिस्तान के कराची में जाकर बसे थे.
उर्दू भाषी और पश्तून लोगों में तनाव
अधिकारियों का कहना है कि दों पक्षों में हिंसा तब शुरु हुई जब एक अज्ञात व्यक्ति ने गोली चलाई.
आपराधिक तत्वों, मादक पदार्थ बेचने वालों और भू-माफ़िया के सदस्यों ने निशाना बनाकर लोगों की हत्या की है एमक्यूएम नेता और मंत्री सब्जवारी
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सिंध प्रांत के मंत्री फ़ैसल सब्ज़वारी ने कहा, "आपराधिक तत्वों, मादक पदार्थ बेचने वालों और भू-माफ़िया के सदस्यों ने निशाना बनाकर लोगों की हत्या की है."
सब्ज़वारी उर्दू भाषियों की मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के सदस्य हैं और उनका दावा था कि उनकी पार्टी के तीन लोग मारे गए हैं. एमक्यूएम केंद्र में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सहयोगी है.
राष्ट्रपति ज़रदारी के एक प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति ने इस हिंसा की निंदा की है और लोगों को एकजुट होने का आहवान किया है. कराची के अस्पतालों में डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में ऐसे कई लोगों के शव लाए गए हैं जिन्हें गोलियाँ लगी थीं.
पाकिस्तान के अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स के एक प्रवक्ता का कहना था कि 25 संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और उनसे हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है. कराची की सड़कों पर पुलिस के अलावा कोई और नज़र नहीं आ रहा है.
क़रीब डेढ़ करोड़ की जनसंख्या वाले कराची में ज़्यादातर उर्दू भाषी लोग रहते हैं जो 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे. इसी शहर में सूबा सरहद प्रांत से आकर बसे पश्तूनों की भी काफ़ी संख्या है.


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