कराची में जातीय हिंसा में 29 की हत्या (लीड-1)
अर्धसैनिक बल सिंध रेंजर्स के जवान सड़कों पर गश्त कर रहे हैं। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के समर्थकों और शहर में अल्पसंख्यक पठानों के बीच हिंसक संघर्ष से लोगों में घबराहट फैल गई है। हिंसा में 20 वाहनों को भी जला दिया गया।
कराची के पुलिस प्रमुख वसिम अहमद ने समाचार पत्र 'डॉन' को बताया कि पूरे शहर में हुई हिंसा में 20 लोगों की मौत हुई। इनमें 16 पश्तून और तीन उर्दू भाषी लोग हैं।
अस्पताल सूत्रों ने मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई है। अस्पताल में भर्ती कुछ घायलों की भी मौत हुई है।
पुलिस ने बताया कि हिंसा गुरुवार सुबह तब आरंभ हुई जब उत्तरी कराची में एक पहाड़ी पर मोर्चा जमाए हथियार बंद व्यक्तियों ने पहाड़ी के नीचे स्थित झुग्गी बस्ती 'जरीना कालोनी' पर गोलीबारी शुरू कर दी।
गोलीबारी की जद में आने पर सुबह 10.30 बजे एमक्यूएम के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि शव को अपने कब्जे में लेने गए एक सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल को भी गोली लगी और वे घायल हैं।
उत्तरी कराची के पुलिस अधीक्षक फारुक अहमद ने कहा कि पुलिस और सिंध रेंजर्स ने जवाबी गोलीबारी करके बंदूकधारी को पीछे हटने को विवश कर दिया। इसके बाद पुलिस और रेंजर्स ने पहाड़ी पर तलाशी अभियान में 16 लोगों को पकड़ा और कुछ हथियार बरामद किए।
एमक्यूएम मुहाजिरों का प्रतिनिधित्व करता है जो वर्ष 1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद वहां पहुंचे थे। मुहाजिर कराची में बहुसंख्यक हैं और वहां के अल्पसंख्यक समुदाय पठानों से उनका संघर्ष चलता रहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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