आईएसआई को गोपनीय रक्षा दस्तावेज भेजने वाले पाकिस्तानी को उम्रकैद
मलिक अरशद महमूद (44 वर्ष) को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा तीन और चार, भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र) और विदेशी कानून की धारा 14 के तहत दोषी पाया गया।
मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले प्रथम अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र न्यायाधीश एल.श्रीराम मूर्ति ने उसके भारतीय साथी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
इस पाकिस्तानी नागरिक को महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों के चित्र इंटरनेट से पाकिस्तान की इंटर सर्विसिज इंटेलीजेंस (आईएसआई) के अपने आकाओं को भेजते समय नौ मार्च 2004 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मलिक फर्जी पासपोर्ट के सहारे बांग्लादेश सीमा से भारत में घुसा था। उसके पास से एक कंप्यूटर और कुछ दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।
पुलिस ने मलिक के लिए हवाला के माध्यम से धन उपलब्ध कराने वाले मिलिंद दत्तात्रेय को भी गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि चार पाकिस्तानी और एक बांग्लादेशी इनकी मदद करते हैं लेकिन उनको पकड़ा नहीं जा सका।
पुलिस ने मलिक और दत्तात्रेय के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। जहां मलिक को 14 वर्ष के कारावास का दंड दिया गया वहीं दत्तात्रेय को साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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