श्रीलंका पर युद्ध अपराधों के खतरे का साया : ब्रिटेन
लंदन, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने श्रीलंका को राष्ट्रकुल से निलंबित किए जाने की मांग को खारिज कर दिया है लेकिन वहां जारी ताजा विवाद के कारण देश पर युद्ध अपराधों की छाया मंडराने लगी है।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री गिलियन मेरोन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों को विवादित क्षेत्रों से दूर रखने के श्रीलंका सरकार के निर्णय के कारण वहां युद्ध अपराधों का खतरा पैदा हो गया है।
मेरोन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी पार्टी लिबरल डेमोक्रेट के विदेशी मामलों के प्रवक्ता एड डैवी ने ब्रिटिश संसद में बुधवार को कहा कि श्रीलंका के हालात कुछ-कुछ रवांडा जैसे बन गए हैं। रवांडा में वर्ष 1994 में भारी नरसंहार हुआ था।
डैवी ने इस संदर्भ में अमेरिका में इलिनॉयज युनिवर्सिटी के प्राध्यापक और नरसंहार मामलों के विशेषज्ञ फ्रांसिस बॉयले के दृष्टिकोण का हवाला दिया। बॉयले का मानना है कि श्रीलंका में जारी लड़ाई नरसंहार का रूप ले सकती है।
लेकिन मेरोन ने श्रीलंका को राष्ट्रकुल से निष्कासित किए जाने की मांग को खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा है कि ब्रिटिश और अंतराष्ट्रीय समुदाय श्रीलंका सरकार को बातचीत में शामिल रखना चाहता है। इसके साथ ही मेरोन ने श्रीलंका में युद्ध क्षेत्र में फंसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए अमेरिका, फ्रांस और भारत द्वारा की गई कोशिशों का जिक्र किया।
इस पर डैवी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को कोलंबो के खिलाफ प्रतिबंधों को लगाए जाने की धमकी का भी इस्तेमाल करना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.9 अरब डॉलर के ऋण के लिए श्रीलंका की ओर से दिए गए आवेदन का जिक्र किया।
खबरों के मुताबिक अमेरिका उस ऋण को रोकने की धमकी दे रहा है।
दरअसल, पश्चिमी सरकारें श्रीलंका सरकार द्वारा बिना शर्त युद्ध विराम की घोषणा से इंकार किए जाने को लेकर चिंतित हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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