श्रीलंका में दो लाख लोग विस्थापित

होम्स ने कहा कि लिट्टे विद्रोहियों ने अब तक युद्ध क्षेत्र में फंसे नागरिकों को वहां से निकलने की इजाजत नहीं दी है। होम्स के अनुसार सरकार की दूसरी समस्या राहत शिविरों में शरणार्थियों की बढ़ती संख्या है। युद्ध क्षेत्रों से बचकर यहां दो लाख लोग पहुंच चुके हैं। इन शरणार्थियों की दशा बहुत सोचनीय है। इसके अलावा शरणार्थियों की संख्या जल्द ही और भी बढ़ सकती है।
चिकित्सा सहायता की बेहद कमी
होम्स ने मंगलवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात कर युद्ध क्षेत्र में फंसे नागरिकों की हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए उनकी तत्काल मदद की जरूरत पर जोर दिया था। होम्स ने कहा कि लिट्टे द्वारा इन नागरिकों को युद्ध क्षेत्रों से निकलने की इजाजत देने से मना किए जाने के मद्देनजर वहां तक ज्यादा मानवीय सहायता पहुंचाई जानी चाहिए। होम्स ने कहा "हम समझते हैं कि वहां लोग भूख से तड़प रहे हैं और चिकित्सा सहायता की बेहद कमी है"।
शरणार्थियों की सहायता से संबद्ध संयुक्त राष्ट्र आयोग (यूएनएचसीआर) के अनुसार 160,000 लोग सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में दाखिल हुए हैं। इनमें से ज्यादातर को वावुनिया, जाफना और त्रिंकोमाली में ठहराया गया है। यूएनएचसीआर ने सरकार को राहत सामग्री तत्काल जारी करने और विस्थापितों को रखने के लिए सरकारी इमारतों का इस्तेमाल करने की इजाजत देने का अनुरोध किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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