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भारतीय चुनाव:आपके सवालों के जवाब-2

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भारतीय चुनाव:आपके सवालों के जवाब-2

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना यूँ तो अप्रैल 1980 में हुई थी लेकिन इससे पहले यह पार्टी भारतीय जनसंघ के रूप में जानी जाती थी. जनसंघ की स्थापना सन् 1951 में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कॉंग्रेस पार्टी धर्म निरपेक्षता के नाम पर राष्ट्रवाद और हिंदू हितों के विरुद्ध काम कर रही है. सन् 1952 में हुए पहले आम चुनाव में जनसंघ को सिर्फ़ तीन सीटें प्राप्त हुई थीं लेकिन 1957 के चुनाव में वो बढ़कर चार हो गईं और 1962 में चौदह. फिर भी वह कॉंग्रेस का ज़माना था और नेहरू के प्रभावशाली नेतृत्व के कारण विपक्षी दलों का रास्ता आसान नहीं था.

जब 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की तो 1977 में जनसंघ के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी का गठन किया और भारत में पहली बार ग़ैर कॉंग्रेसी सरकार बनी. इस सरकार में पूर्व जनसंघ के दो बड़े नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए गए. अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने और लालकृष्ण आडवाणी को सूचना और प्रसारण मंत्रालय मिला. जनता पार्टी के विघटन के बाद अप्रैल 1980 में पूर्व जनसंघ के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का गठन किया और एक बार फिर हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीति आरंभ कर दी लेकिन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उठी चुनावी लहर में भाजपा का सफ़ाया हो गया और उसे कुल दो ही सीटें मिलीं.

आडवाणी को 2009 के चुनाव में भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया

अगले चुनाव में जब 85 सांसद चुन कर आए तो भाजपा के नेता खुलकर हिंदू पुनरुत्थान के नारे लगाने लगे और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का आंदोलन छेड़ दिया. लालकृष्ण आडवाणी ने 10000 किलोमीटर की रथ यात्रा की जिसके बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए और 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई. अनेक राजनीतिक समीक्षकों ने कहा कि भाजपा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नष्ट करके धार्मिक उन्माद की राजनीति कर रही है. लेकिन इस सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का पार्टी को लाभ हुआ और 1996 के चुनाव में संसद में उसी सीटें बढ़कर 161 हो गईं.

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो लेकिन वह संसद में बहुमत सिद्ध नहीं कर पाई. पार्टी के नेताओं को अहसास हुआ कि उग्र हिंदूवाद के आधार पर अकेले सत्ता हासिल करना मुश्किल होगा. हिंदुत्व के एजेंडा में नरमी लाई गई, क्षेत्रीय दलों से समझौते किए गए और 1998 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन या एनडीए का गठन हुआ. इस बैनर तले जब भाजपा चुनाव में उतरी तो उसके तीन प्रमुख मुद्दे - राम मंदिर का निर्माण, जम्मू कश्मीर में धारा 370 का उन्मूलन और समान नागरिक संहिता का लागू किया जाना ग़ायब थे. इस बार चुनाव जीता गया और अटल बिहारी वाजपेयी फिर प्रधानमंत्री बने. लेकिन 2004 के चुनाव में इंडिया शाइनिंग का नारा उल्टा पड़ा और एनडीए की हार हुई. वर्ष 2009 के चुनाव में सुशासन, विकास और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे हैं.

दमन कुमार झा यह जानना चाहते हैं कि अभी तक सबसे ज़्यादा किस पार्टी की सरकार बनी है और कब-कब?

सबसे अधिक बार सरकार बनाई है भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस ने जिसे हम कांग्रेस के नाम से जानते हैं. पहली लोकसभा की कुल 489 सीटो में से कांग्रेस को 364 सीटें मिली थीं और पं जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने थे. उसके बाद 1957 और 1962 के चुनाव भी कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीते और पंडित नेहरू अपने पद पर बने रहे. फिर 27 मई 1964 को जब उनका निधन हो गया तो अंतरिम प्रधानमंत्री बने गुलज़ारी लाल नंदा. उसके बाद पार्टी ने लाल बहादुर शास्त्री को अपना नेता चुना. लेकिन 11 जनवरी 1966 को उनका भी निधन हो गया और अंतरिम रूप से गुलज़ारी लाल नंदा ने ही एक बार पि कार्यभार संभाला. फिर पार्टी ने इंदिरा गांधी को नेता चुना और वो भारत की प्रधानमंत्री बनीं. सन् 1967 और 1971 में उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और जीता.

नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने अनेक वर्षों तक सरकार चलाई

संक्षेप में कहें तो आज़ादी के बाद से लेकर मार्च 1977 तक पांच बार कांग्रेस की ही सरकार बनी. उसके बाद कांग्रेस ने 1980 का चुनाव इंदिरा गांधी के नेतृत्व में लड़ा और जीता. सन 1984 में उनकी हत्या के बाद राजीव गांधी ने यह पद संभाला और 1984 के चुनाव में कांग्रेस को भारी समर्थन मिला. सन 1991 का चुनाव फिर कांग्रेस ने जीता और प्रधानमंत्री बने नरसिम्हा राव. उसके बाद फिर 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में बने गठबंधन यूपीए की विजय हुई और प्रधानमंत्री बने डॉक्टर मनमोहन सिंह.

लोकसभा में कितने ऐंग्लो इंडियन सांसद होते हैं और उनका चुनाव कैसे होता है. यह सवाल पूछा है नई दिल्ली से पारुल मेहता ने.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 331 के अनुसार लोकसभा में ऐंग्लो इंडियन समुदाय के अधिक से अधिक दो सदस्यों के मनोनयन का प्रावधान है. इन्हें राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं, अगर उन्हें लगे कि इस समुदाय का संसद में यथोचित प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है. ऐंग्लो इंडियन उन्हें कहा जाता है जिनके पूर्वज भारतीय और ब्रिटिश मूल के थे. भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के अधीन ऐंग्लो इंडियन वह व्यक्ति है जिसके पिता या पिता के पूर्वज यूरोपीय मूल के हों, लेकिन जो स्थाई रूप से भारत में रहता हो या जिसका जन्म भारत में स्थाई रूप से रह रहे दंपति के घर हुआ हो. भारत की आज़ादी से पहले इस संकर नस्ल के कम ही लोग थे लेकिन अधिकांश ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, कनाडा आदि देशों में जा बसे इसलिए अब उनकी संख्या और भी कम हो गई है.

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