स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए क्या भारत के पास पर्याप्त दवाएं हैं?

लंदन, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। स्वाइन फ्लू में प्रभावी वायरस निरोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता भारत के पास है या नहीं,यह अपने आप में एक सवाल है। माना जा रहा है कि देश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मात्रा के मुताबिक दवाओं की उपलब्धता नही है।

ब्रिटिश मीडिया के अनुसार किसी आपात स्थिति में किसी देश की सुरक्षा के लिए दवाओं की निर्धारित मात्रा का स्तर यह है कि उसके पास अपनी कुल आबादी के 10 प्रतिशत हिस्से के इलाज के लायक दवाओं का पर्याप्त खुराक होना चाहिए।

हालांकि इस बारे में जानकारी नहीं है कि इस तरह के निर्धारित मानक को डब्ल्यूएचओ का समर्थन है या नहीं।

जहां तक स्वाइन फ्लू में कारगर होने वाली दो महत्वपूर्ण दवाओं का मामला है, उस मामले में वैश्विक तैयारी स्पष्ट रूप से अमीर और गरीब देशों के बीच बंट गई है।

टैमीफ्लू की कोई 22 करोड़ खुराक पूरी दुनिया की सरकारों के हाथों में है। लेकिन अमीर देशों ने इस दवा के ज्यादा खुराक जमा कर रखे हैं। यह सच्चाई वर्ष 2004 में फैले बर्ड फ्लू के मामले में खुल कर सामने आ गई थी।

ब्रिटेन की सरकारी सहायता प्राप्त स्वास्थ्य प्रणाली ने देश की लगभग आधी आबादी, यानी तीन करोड़ लोगों के इलाज के लायक टैमीफ्लू की खुराक जमा कर रखी है।

अमेरिका के पास टैमीफ्लू और रीलेंजा की पांच करोड़ खुराक हैं।

इसके ठीक विपरीत भारतीय स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उसके पास टैमीफ्लू की मात्र 10 लाख खुराक ही हैं।

इसके अतिरिक्त टैमीफ्लू के समानांतर संस्करण का उत्पादन करने वाली भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनी सिपला ने कहा है कि वह चार से छह सप्ताह के भीतर 15 लाख खुराक का उत्पादन कर सकती है।

हालांकि डब्ल्यूएचओ की सूची में स्वाइन फ्लू से प्रभावित देशों की सूची में भारत का नाम शामिल नहीं है।

वर्ष 2004 में फैले बर्ड फ्लू के समय ही अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया, इटली व फ्रांस जैसे अमीर देशों ने पर्याप्त मात्रा में टैमीफ्लू जमा कर ली थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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