स्वाइन फ्लू : विकासशील देश तैयार नहीं
लंदन, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि विकसित देशों की तुलना में भारत समेत निम्न और मध्य आय वाले विकासशील देश स्वाइन फ्लू के मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
चिकित्सकीय पत्र 'द लांसेट' लिखता है, "हमारी प्रमुख चिंता यह है कि निम्न और मध्य आय वर्ग वाले देश स्वाइन फ्लू के वायरस के दुष्प्रभावों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।"
मंगलवार को प्रकाशित संपादकीय में पत्र लिखता है, "इतिहास गवाह है कि विकासशील देशों में इंफ्लुएंजा की महामारी का काफी असर पड़ता है।"
पत्र में सन 2006 में छपे एक लेख का जिक्र है जिसमें सन 1918-20 में स्पेनिश इंफ्लुएंजा की महामारी के आंकड़ों की मदद से अनुमान प्रकट किया गया था कि दुनिया में अगली बार इंफ्लुएंजा की महामारी फैलने पर 6.2 करोड़ लोग मारे जाएंगे जिनमें से 96 फीसदी की मौत निम्न और मध्य आयवर्ग वाले देशों में होगी।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब ऐसे प्रमाण मिले हैं कि स्वाइन फ्लू के इलाज में काम आने वाली दो दवाएं तामिफ्लू और रेलेंजा अमूमन अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, इटली और जापान आदि धनी देशों के पास ही हैं।
एक ओर जहां ब्रिटेन के पास तीन करोड़ लोगों के इलाज के लिए पर्याप्त दवा है वहीं भारत के पास महज 1,42,000 लोगों के इलाज की दवा अभी उपलब्ध है।
मेक्सिको में इस बीमारी से कई लोगों की मौत हुई जो खुद एक विकासशील देश है।
इस बीच स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए टीके के निर्माण की कोशिशें चालू हैं हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इस काम में चार से छह महीने का समय लग सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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