ब्रिटेन और फ्रांस के विदेश मंत्री श्रीलंका में, बौद्धों ने किया विरोध (लीड-3)
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलीबैंड और फ्रांस के विदेश मंत्री बर्नार्ड कचनर ने श्रीलंकाई विदेश मंत्री रोहिता बोगलागामा से मुलाकात कर तमिल नागरिकों के मारे जाने विस्थापित होने के संबंध में विचार विमर्श किया। उनकी बातचीत का ब्यौरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका है।
मिलीबैंड और कचनर का वावूनिया के शरणार्थी शिविरों का दौरा करने के बाद राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात का कार्यक्रम है।
दोनों विदेश मंत्रियों की यह यात्रा ऐसे मौके पर हो रही है जबकि यूरोपीय संघ ने सोमवार को श्रीलंका से तत्काल संघर्षविराम की अपील की थी ताकि युद्ध क्षेत्र में फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
स्वीडन के विदेश मंत्री कार्ल ब्लिड्ट भी यूरोपीय विदेश मंत्रियों के साथ यहां आने वाले थे लेकिन उनका कहना है कि श्रीलंका सरकार ने उन्हें वीजा नहीं दिया। जबकि बोगलागामा ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि ब्लिड्ट ने वीजा के लिए आवेदन ही नहीं किया था।
कोलंबो में ब्रिटिश दूतावास के बाहर भिक्षुओं ने प्रदर्शन कर विदेश मंत्रियों के श्रीलंका दौरे के प्रति विरोध व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति की समर्थक जातिका हेला उरूमया पार्टी के थे। श्रीलंका में बौद्ध सिंहलियों की आबादी करीब 73 फीसदी है जबकि तमिल हिंदुओं की तादाद महज 18 प्रतिशत है।
युद्ध रुकवाने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों के बीच श्रीलंकाई नौसेना ने दावा किया है कि बुधवार तड़के कम से कम 25 तमिल विद्रोहियों को मार गिराया गया और उनकी छह नौकाओं को नष्ट कर दिया गया। इस बारे विद्रोहियों की ओर से कोई बयान अभी तक नहीं आया है।
लिट्टे विद्रोही और नागरिक अब सिर्फ 10 किलोमीटर से भी कम इलाके में बचे हैं। नागरिकों को भोजन और दवाइयों की घोर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि गत 2 अप्रैल से वहां सहायता सामग्री की कोई खेप नहीं पहुंची।
दो ही दिन पहले सरकार ने लिट्टे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में भारी हथियारों का इस्तेमाल रोकने की घोषणा की थी ताकि वहां फंसे नागरिकों को बाहर निकलने का मौका मिल सके।
सेना का कहना है कि वह विद्रोहियों को कुचलने के अभियान के आखिरी दौर में पहुंच गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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