ब्रिटेन और फ्रांस के विदेश मंत्री श्रीलंका पहुचे (लीड-1)
पी.करुणाकरन
कोलंबो, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। ब्रिटेन और फ्रांस के विदेश मंत्री श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में जारी मानवीय संकट पर विचार विमर्श के लिए बुधवार को यहां के एक दिन के दौरे पर पहुंचे जबकि श्रीलंकाई सेना छोटे से तटीय इलाके में सिमट कर रह गए तमिल विद्रोहियों से मुकाबला कर रही है।
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलीबैंड और फ्रांस के विदेश मंत्री बर्नार्ड कचनर ने बुधवार सुबह श्रीलंका के विदेश मंत्री रोहिता बोगलागामा से मुलाकात कर श्रीलंका के उत्तरी हिस्से के हालात पर चर्चा की।
वावूनिया के शरणार्थी शिविरों का दौरा करने से बाद वे राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से भी मुलाकात करेंगे। लिट्टे विद्रोही और नागरिक अब 10 किलोमीटर से भी कम इलाके में बचे हैं। सेना का कहना है कि वह विद्रोहियों को कुचलने के अभियान के आखिरी दौर में पहुंच गई है।
युद्ध क्षेत्रों में फंसे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ने पर सोमवार को श्रीलंका सरकार ने लिट्टे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में भारी हथियारों का इस्तेमाल रोकने की घोषणा की थी ताकि वहां फंसे नागरिकों को बाहर निकलने का मौका मिल सके। सरकार का कहना है कि उसने यह कदम अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं बल्कि नागरिकों को और ज्यादा नुकसान पहुंचाने से बचाने के लिए उठाया है। सेना का अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
दोनों विदेश मंत्रियों के दौरे को लेकर कूटनीतिक विवाद भी छिड़ गया है। स्वीडन का कहना है कि उसके विदेश मंत्री कार्ल ब्लिड्ट भी यूरोपीय विदेश मंत्रियों के साथ यहां आने वाले थे लेकिन उन्हें वीजा नहीं दिया गया। जबकि श्रीलंका सरकार ने बुधवार को इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि ब्लिड्ट ने वीजा के लिए औपचारिक आवेदन ही नहीं किया था। सरकार ने ब्लिड्ट को मई के आरंभ में आने का निमंत्रण दिया है।
ब्रिटिश और फ्रांसीसी विदेश मंत्रियों की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब श्रीलंकाई सेना मुल्लइतिवू इलाके में फंसे करीब 50,000 नागरिकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
नागरिकों को भोजन और दवाइयों की घोर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि गत 2 अप्रैल से वहां सहायता सामग्री की कोई खेप नहीं पहुंची।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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