पाकिस्तान ने बुनेर में तालिबान के खिलाफ कार्रवाई शुरू की (राउंडअप-इंट्रो)
सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल अथर अब्बास ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। हमने लंबे समय तक उनको सहन किया और उन्हें बुनेर खाली करने के पर्याप्त मौके दिए।"
इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) के प्रमुख अब्बास ने कहा, "बुनेर में कार्रवाई शाम चार बजे शुरू हुई। निचले दीर में कार्रवाई समाप्त हो गई है। करीब 70-75 आतंकवादी मारे गए हैं। सुरक्षा बल के 10 जवानों की भी मौत हुई है।" उन्होंने कहा कि दार में कार्रवाई जरूरी थी।
बुनेर में अब्बास ने कहा कि करीब 300 तालिबानियों ने इसे आतंक का क्षेत्र बना दिया है। वे युवाओं को तालिबान में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
इससे पहले बढ़ते आतंकवादी खतरों से निपटने में इस्लामाबाद की 'अक्षमता' पर अमेरिका द्वारा व्यक्त की गई चिंता के बीच पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "अब बहुत हो चुका। यदि सरकार को चुनौती दी गई या फिर देश में कोई आतंकवादी वारदात की गई तो हम कड़े कदम उठाएंगे।"
अस्थिर पश्चिमोत्तर प्रांत के निचले दीर जिले में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े एक सवाल पर रहमान ने कहा कि यह उन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई है जो समझौते के मुताबिक क्षेत्र में शांति स्थापित करने में बाधा डालना चाहते हैं।
उधर, अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टॉफ एडमिरल माइक मुलेन ने पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवादी खतरों और इनसे लड़ने में इस्लामाबाद की नाकामी पर चिंता जाहिर की है।
एक अमेरिकी टेलीविजन चैनल के मुताबिक मुलेन के प्रवक्ता कैप्टेन जॉन किर्बी ने कहा, "तीन सप्ताह से कम समय के भीतर दो बार पाकिस्तान की यात्रा करने वाले मुलेन ने वहां जो कुछ देखा उसको लेकर काफी चिंतित हैं।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा की स्थिति काफी खराब है।
स्वात घाटी में जो कुछ चल रहा है उसके बारे में मुलेन की चिंता से अवगत कराते हुए किर्बी ने कहा, "शांति समझौते के तहत हथियार रखने के बजाय तालिबान ने इन्हें फिर से उठा लिया है।"
इस बीच पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की सरकार ने तहकरीक-ए-निफाज-ए-शरीयत मुहम्मदी (टीएनएसएम) के प्रमुख सूफी मुहम्मद को शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया और कहा कि यदि शांति समझौते का उल्लंघन किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञात हो कि टीएनएसएम और एनडब्ल्यूएफपी सरकार ने पिछले 16 फरवरी को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत प्रांत के मलकंद डिविजन में शरिया कानून लागू किया जाना था और उसके बदले तालिबान को हथियार डालना था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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