तीसरे चरण के मतदान से पूर्व बोफोर्स का जिन्न फिर बोतल से बाहर (राउंडअप)
दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस घोटाले के एक मात्र जीवित बचे आरोपी क्वोत्रोची का नाम अपनी 'मोस्ट वांटेड' सूची से हटाए जाने का फैसला कर इस जिन्न को फिर से बाहर निकालने का काम किया है। इसका खुलासा मंगलवार को एक अंग्रेजी दैनिक ने किया। इसके मुताबिक सीबीआई ने इंटरपोल से कहा है कि क्वोत्रोची का नाम रेड कार्नर नोटिस सूची से हटा लिया जाए।
सीबीआई के प्रवक्ता हर्ष बहल ने कहा कि सीबीआई अपने इस फैसले के बारे में दिल्ली की एक अदालत के एक विशेष जज को अवगत कराएगी। इस मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होनी है।
गौरतलब है कि वर्ष 1987 से यह मामला चल रहा है जिसमें स्वीडिश होवित्जर तोपों की खरीददारी में 64 करोड़ रुपये की दलाली अदा करने का आरोप है।
बहरहाल, क्वोत्रोची का जिन्न बोतल से बाहर आने के साथ ही राजनीतिक हलकों में एक बार फिर इस बहुचर्चित मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने कहा है कि इस मामले में अब कोई दम नहीं बचा है वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्र सरकार पर सीबीआई का राजनीतिक दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यह केंद्र की सत्ता से उसकी विदाई का संकेत है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मंगलवार को अहमदाबाद में कहा क्वोत्रोची का नाम सीबीआई की 'मोस्ट वांटेड' सूची से हटा लिया जाना यह दर्शाता है कि कांग्रेस को यह अहसास हो चला है कि वह दोबारा सत्ता में नहीं लौट रही है।
आडवाणी ने यहां संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पार्टी क्वोत्रोची का नाम सूची से हटा लेना चाहती थी। इस फैसले से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस को इस बात का अहसास है कि वह सत्ता में वापस नहीं आ रही है।"
उन्होंने कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पार्टी को 1984 में बहुमत मिला था लेकिन बोफोर्स मुद्दे के चलते वह अगले चुनाव में हार गई। फिर से एक बार वही स्थिति दोहराई जाने वाली है मौजूदा चुनाव में।"
पार्टी महासचिव अरुण जेटली ने भी यहां संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "सीबीआई देश के लिए शर्मिदगी का विषय बन गई है। क्वोत्रोची कांग्रेस नेतृत्व का करीबी मित्र रहा है। इसलिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने अपनी विदाई से पहले क्वोत्रोची को उपहार दिया है।"
भाजपा के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी कहा है कि जब तक केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार रहेगी तब तक बोफोर्स मामले में न्याय का गला दबाया जाना जारी रहेगा।
माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "बोफोर्स घोटाले के एक मात्र जीवित बचे आरोपी ओतावियो क्वोत्रोची का नाम इंटरपोल की 'मोस्ट वांटेड' सूची से हटा लिए जाने संबंधी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की सिफारिश, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार का इस मामले को दबाने का एक और प्रयास है।"
विपक्ष के इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "बोफोर्स के मामले में कोई दम नहीं बचा है, भाजपा कई चुनावों में लाभ उठाने के लिए इस मुद्दे को उठा चुकी है। ..क्वोत्रोची के खिलाफ कोई मामला अब संभवत: देश में लंबित नहीं है। इसमें राजनीतिक कुछ भी नहीं है। यह सीबीआई, सरकार और क्वोत्रोची से संबंधित विषय है।"
उधर, रायबरेली में कांग्रेस का बचाव करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी ने भी कहा है कि इस मामले में सीबीआई पर कोई दबाव नहीं था। अपनी मां के लिए यहां चुनाव प्रचार कर रही प्रियंका ने कहा, "बोफोर्स मामले में कांग्रेस ने कभी सीबीआई पर दबाव नहीं डाला।"
भाजपा द्वारा सीबीआई को 'कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन' करार देने पर उन्होंने कहा, "इन मुद्दों का चुनाव से क्या लेना-देना।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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