समलैंगिकों का समर्थन 'अपेक्षाकृत सहिष्णु' कांग्रेस को
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। स्त्री एवं पुरुष समलैंगिक, उभयलिंगी और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय को भले ही भेदभावपूर्ण कानूनों से मुकाबले में किसी राजनीतिक दल का समर्थन न मिला हो लेकिन इस चुनाव में उसके सदस्य कांग्रेस को वोट देंगे क्योंकि उनका मानना है कि वह औरों की अपेक्षा अधिक सहिष्णु पार्टी है।
एड्स के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम यूएनएड्स के अधिकारियों के मुताबिक देश में समलैंगिकों की संख्या के बारे में आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। दरअसल ऐसे आंकड़ों को एकत्रित करना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 के तहत अवैध है लेकिन अनुमानों के मुताबिक देश की आबादी का पांच फीसदी हिस्सा समलैंगिक है।
इतिहास के विद्वान और समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता सलीम किदवई के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद किसी दल ने उनके मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया।
एक अन्य समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता प्रमदा मेनन के मुताबिक कुछ राजनीतिक हलकों में समलैंगिकों को लेकर सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में कार्यकर्ताओं ने कुछ राजनीतिक दलों से संपर्क किया और उन्हें सकारात्मक जवाब मिला हालांकि ऐसा बहुत कम ही देखने को मिल रहा है।
मतदान के बारे में समुदाय के अधिकांश सदस्यों की राय कांग्रेस और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के पक्ष में जाती है।
पेशे से दंत चिकित्सक श्रीवाथ ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से संप्रग सरकार का समर्थन करेंगे क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि किसी और के पास उतना धैर्य है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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