84 के दंगा पीड़ितों के लिए आज विकास ज्यादा महत्वपूर्ण
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। सन 1984 के दंगा पीड़ितों के लिए विकास का मुद्दा किसी भी अन्य मुद्दे से बड़ा है।
सिख विरोधी दंगों के बाद महज दो वर्ष की उम्र में परिजनों के साथ जेल में डाल दी गई अमरजीत कौर अपने बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अतीत को भुलाना बेहतर समझती हैं।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दिए जाने के बाद दंगों में अमरजीत के तीन परिजन मारे गए थे। उस दौरान राजधानी में 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे।
अमरजीत ने कहा, "मैं अपने दादा, पिता और चाचा के लिए न्याय की लड़ाई और आगे नहीं ले जाना चाहती। हर बार राजनीतिक दल चुनाव के अवसर यह मुद्दा उठाते हैं लेकिन कुछ नहीं होता। मैं तो उसी उम्मीदवार को वोट दूंगी जो विकास का वादा करेगा।"
एक स्थानीय दुकान में हेल्पर के रूप में काम करने वाले बेअंत सिंह ने आईएएनएस से कहा, "जो होना था वह हो चुका, कब तक हम अतीत का दामन थामकर रोते रहेंगे।"
रिक्शा चलाकर अपना गुजारा करने वाले सुरिंदर सिंह ने कहा, "मेरे पिता को न्याय के लिए लड़कर क्या मिला? मैं तो उसी पार्टी को वोट दूंगा जो मेरे बच्चों को रोजगार दिलाने का वादा करेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications