सरकार और तालेबान की बातचीत रुकी

पाकिस्तानी सेना और तालेबानी चरमपंथियों के बीच सूबा सरहद के लोअर दीर में संघर्ष हुआ है जिसकी वजह से सैकड़ों नागरिकों को मजबूरन वहाँ से निकलकर भागना पड़ा.
सूबा सरहद के अधिकारी एक ऐसे समझौते पर राज़ी हो गए थे जिसके तहत तालेबान से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के बदले क्षेत्र में शरिया क़ानून लागू करना पड़ा.
आलोचकों का कहना था कि यह समझौता चरमपंथियों के सामने हथियार डालने जैसा है.
सरकार और तालेबान के बीच समझौता कराने वाले नेता सूफ़ी मोहम्मद के प्रवक्ता आमिर इज़्ज़त ख़ान ने कहा, "हमारे नेताओं की परिषद ने रविवार की रात को सूबा सरहद की सरकार के साथ हुए शांति समझौते को रोकने के बारे में निर्णय किया."
उन्होंने कहा कि तालेबान अब भी पिछले फरवरी महीने में हुए शांति समझौते पर अडिग रहना चाहता है.
इज़्ज़त ख़ान ने कहा कि सूफ़ी मोहम्मद लोअर दीर में स्थित अपने गाँव में हैं, लेकिन उसका संपर्क बाक़ी जगह से टूटा हुआ है.
जब तक ये संपर्क बहाल नहीं होता, कोई बातचीत नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा, "हम इस कार्रवाई को अभी रोकने की माँग कर रहे हैं ताकि सूफ़ी मोहम्मद अपने गाँव से बाहर आ सकें."
आमिर इज़्ज़त खान ने कहा कि यह सैनिक अभियान शांति समझौते के ख़िलाफ़ है और हमारा मानना है कि जब इलाक़े में हिंसा हो रही हो, ऐसे में शांति के बारे में बात करने का कोई अर्थ नहीं है.
आत्मरक्षा
लोअर दीर में हालात तनाव में हैं और लोग संघर्ष वाले इलाक़े से निकल रहे हैं.
पाकिस्तानी सेना ने कहा कि सेना ने सोमवार को मैदान इलाक़े में 20 और चरमपंथियों को मार दिया है.
सूबा सरहद की सरकार का कहना है कि रविवार को कम से कम 25 ऐसे लोग मारे गए थे जिनपर चरमपंथी होने का शक था. उन्होंने सेना के काफ़िले पर हमला किया था.
यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब सरकार ने पिछले सप्ताह ज़िले के कुछ इलाक़ों में सेना तैनात कर दी.
इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इलियास का कहना है कि अंदाज़ लगाया जा रहा है कि यह बुनेर ज़िले की तरह चरमपंथियों के हमले से बचने के लिए किया गया.
शनिवार को लोअर दीर में 12 बच्चों के मारे जाने के बाद यह ऑपरेशन किया गया जो एक बम को फुटबॉल समझ कर खेल रहे थे.


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