'मोदी के ख़िलाफ़ शिकायत की जाँच'

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी जाकिया नसीम एहसान और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ की याचिका पर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि विशेष जाँच दल (एसआईटी) तीन महीने के अंदर शिकायत की जाँच करके अपनी रिपोर्ट दे.
एसआईटी गुजरात दंगों से जुड़े अन्य कई मामलों की भी जाँच कर रही है. एसआईटी की अगुआई सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन कर रहे हैं.
एहसान जाफ़री कांग्रेस के पूर्व सांसद थे और गुजरात दंगों के दौरान मारे गए थे. गुलबर्ग सोसाइटी में आग लगा दी गई थी, जिसमें एहसान जाफ़री समेत 38 लोग मारे गए थे.
याचिका
एहसान जाफ़री की पत्नी जाकिया नसीम एहसान ने नवंबर 2007 में गुजरात हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे ख़ारिज़ कर दिया था.
उसके बाद ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. तीन मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस भी जारी किया था.
एहसान जाफ़री की पत्नी गुलबर्ग सोसाइटी कांड की प्रत्यक्षदर्शी हैं और उन्होंने अपनी शिकायत में नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के कई मंत्रियों का ज़िक्र किया है.
वर्ष 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के कारण 59 हिंदू मारे गए थे. जिसके बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे.
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें से ज़्यादातर मुसलमान थे.


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