श्रीलंका के मसले पर करुणानिधि भूख हड़ताल पर बैठे, प्रधानमंत्री ने हालचाल पूछा (लीड-2)
सिंह ने चेन्नई के मरीना बीच पर भूख हड़ताल पर बैठे करुणानिधि से फोन पर बातचीत की। डीएमके के एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीलंकाई सरकार पर लड़ाई खत्म करने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि नागरिकों को बचाया जा सके।
दिल्ली में कांग्रेस महासचिव एम. वीरप्पा मोइली ने संवाददाताओं से कहा कि मनमोहन सिंह करुणानिधि की सेहत को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने फोन पर डीएमके प्रमुख से बातचीत की है।
इससे पहले करुणानिधि ने पत्रकारों से कहा, "श्रीलंका में सरकार की क्रूर कार्रवाई से तमिल समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं। मैंने उन लोगों की खातिर अपनी जान कुर्बान करने का फैसला किया है। "
उन्होंने कहा, "लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने जब रविवार को एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा की तो मैं अच्छी खबर सुनने के लिए पूरी रात टेलीविजन और रेडियो से चिपका रहा। जब कोई शुभ समाचार नहीं आया तो पूरे तमिल जगत की ओर से मैंने यह प्रयास शुरू किया।"
करुणानिधि चेन्नई में डीएमके के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई के स्मारक के सामने में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह किसी को नहीं बताया है कि उनकी भूख हड़ताल कब तक चलेगी।
करुणानिधि की पुत्री और राज्यसभा सदस्य कानीमोझी और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन तथा स्थानीय मंत्री एम.के. स्टालिन ने भूख हड़ताल पर बैठे डीएमके नेता से भेंट की। तमिलनाडु में श्रीलंकाई तमिलों का ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की महासचिव जयललिता के शनिवार के बयान के बाद और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। जयललिता ने कहा था कि तमिलों के लिए पृथक 'ईलम' ही वहां तमिल अल्पसंख्यकों की समस्या का एकमात्र हल है। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और वामदलों ने खुद को जयललिता के बयान से अलग रखा है।
रविवार को लिट्टे ने युद्धविराम की पेशकश की थी जिसे श्रीलंका सरकार ने मखौल कहकर खारिज कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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