सर्वोच्च न्यायालय ने दिया, मोदी के खिलाफ जांच का आदेश (लीड-2)
अदातल के इस आदेश ने कांग्रेस को चुनाव के मध्य मोदी के इस्तीफे की मांग करने का नया आधार मुहैया करा दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी टिप्पणी में कहा, "एक संवैधानिक पदाधिकारी के गाल पर यह एक तमाचा है। हमें इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। मोदी न माफी मांगेंगे न इस्तीफा देंगे और न यही महसूस करेंगे कि उनके राज्य में कोई गलत घटना घटित हुई थी।"
दूसरी ओर भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने कहा, "चुनावों के पूर्व गुजरात संबंधी मामलों को उठाए जाने की परंपरा बन गई है।"
अदालत के आदेश से मायूस मोदी ने एक टीवी संवाददाता के सवालों का जवाब देने से इं्रकार कर दिया। मोदी ने बस इतना ही कहा कि वह इस मुद्दे पर पहले बोल चुके हैं।
ज्ञात हो कि न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आर.के.राघवन की अध्यक्षता वाले जांच दल को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में कांग्रेसी सांसद अहसान जाफरी की हत्या के मामले में मोदी की कथित संलिप्तता के आरोप की जांच करने का सोमवार को निर्देश दिया।
अदालत ने जांच दल को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
मोदी के खिलाफ अपनी टिप्पणी को जारी रखते हुए सिंघवी ने कहा, "उन्हें अभी ही नहीं, बल्कि सात साल पहले ही पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मोदी की सत्ता लोलुपता किसी भी नैतिकता से ऊपर है।"
मोदी के अलावा जिन लोगों के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है, उनमें मोदी के 11 कैबिनेट सहयोगी, तीन वर्तमान विधायक और 38 उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी व नौकरशाह शामिल हैं। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व पुलिस प्रमुृख भी जांच के दायरे में है।
अदालत ने जांच का यह आदेश पूर्व सांसद दिवंगत अली अहसान जाफरी की विधवा जाकिया नसीम अहसान द्वारा दायर एक संयुक्त कानूनी याचिका पर दिया है।
जाकिया ने नवंबर 2007 के गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने गुजरात दंगे में मोदी और अन्य की भूमिका की जांच की मांग से जुड़ी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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