सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका की जांच का आदेश दिया (लीड-1)
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने एक विशेष जांच दल को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 50 से अधिक नेताओं और अधिकारियों पर राज्य में वर्ष 2002 में सांप्रदायिक दंगों को भड़काने और सहायता देने के आरोपों की जांच करने को कहा है। जांच दल का गठन सर्वोच्च न्यायालय ने ही किया है।
न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आर.के.राघवन की अध्यक्षता वाले दल को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में आगजनी की घटना में एक पूर्व सांसद की हत्या के मामले में मोदी की संलिप्तता के आरोप की विशेष रूप से जांच करने का निर्देश दिया।
मोदी के अलावा जिन लोगों के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है, उनमें मोदी के 11 कैबिनेट सहयोगी, तीन वर्तमान विधायक और 38 उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी व नौकरशाह शामिल हैं। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व पुलिस प्रमुृख भी जांच के दायरे में है।
अदालत ने राघवन आयोग को दंगे में कुछ भाजपा और शिवसेना के नेताओं की भूमिका की भी जांच का निर्देश दिया है।
अदालत ने जांच का यह आदेश पूर्व सांसद दिवंगत अली अहसान जाफरी की विधवा जाकिया नसीम अहसान द्वारा दायर एक संयुक्त कानूनी याचिका पर दिया है। दंगाइयों की भीड़ ने अली अहसान जाफरी को अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसायटी स्थित उनके आवास से कथित रूप से बाहर खीच लिया था और उनकी हत्या कर दी थी।
जाकिया ने नवंबर 2007 के गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने गुजरात दंगे में मोदी और अन्य की भूमिका की जांच की मांग से जुड़ी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
अदालत ने जांच दल को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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