श्रीलंका में संघर्ष विराम, करुणानिधि ने अनशन तोड़ा (राउंडअप)
कोलंबो में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि सरकार ने सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का निर्णय लिया है। सुरक्षा बलों को भारी तोपखाने, लड़ाकू विमानों और हवाई हथियारों का प्रयोग रोकने की हिदायत दी गई है। बयान के अनुसार सुरक्षा बल अपनी कार्रवाई केवल बंधक नागरिकों के बचाव और उनकी सुरक्षा तक सीमित रखेंगे।
यह फैसला ऐसे समय में किया गया है जब विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके से सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्र में पहुंचे हजारों नागरिकों की जरूरतों का अंदाजा लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत प्रमुख जान होम्स श्रीलंका में हैं।
इससे पहले नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चेन्नई में भूख हड़ताल पर बैठे करुणानिधि से टेलीफोन पर बातचीत की और उन्हें आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार श्रीलंका सरकार को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए राजी करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
श्रीलंका सरकार के युद्ध विराम की घोषणा के निर्णय के बारे में करुणानिधि को गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने फोन पर जानकारी दी, इसके बाद उन्होंने अनशन तोड़ दिया। करुणानिधि ने संवाददाताओं से कहा, "श्रीलंका ने संघर्ष विराम की घोषणा कर दी है। इसलिए मैं अनशन तोड़ रहा हूं।"
वह चेन्नई में डीएमके के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई के स्मारक के सामने भूख हड़ताल पर बैठे थे। इससे पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा, "श्रीलंका में सरकार की क्रूर कार्रवाई से तमिल समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं। मैंने उन लोगों की खातिर अपनी जान कुर्बान करने का फैसला किया है। "
उन्होंने कहा, "लिट्टे ने जब रविवार को एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा की तो मैं अच्छी खबर सुनने के लिए पूरी रात टेलीविजन और रेडियो से चिपका रहा। जब कोई शुभ समाचार नहीं आया तो पूरे तमिल जगत की ओर से मैंने यह प्रयास शुरू किया।"
अन्नादुरई के स्मारक के सामने करुणानिधि के साथ उनकी दोनों पत्नियां, बेटे एम.के.स्टालिन, बेटी और राज्यसभा सांसद कानीमोझी, भतीजे दयानिधि मारन और राज्य के विद्युत मंत्री एकरोट एन.वीरसामी भी उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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