बॉलीवुड को याद आएंगे फिरोज खान
उनके व्यकित्व ने ना जाने कितने लोगों को प्रभावित किया। कर्नाटक के एक विधायक दिनेश गुंडू राव कहते हैं, "वह प्रभावशाली सितारे थे और सिने उद्योग में उनकी उपस्थिति इसी रूप में थी। वह स्टाइलिश सिने हस्ती के तौर पर पहचाने जाते रहे हैं। इस उम्र में भी वह भव्य दिखते थे। उन्होंने साबित कर दिखाया था कि कोई व्यक्ति बालों के बिना भी बेहद आकर्षक बना रह सकता है।"
फिरोज के निधन से फिल्म उद्योग में मायूसी छाई हुई है। फिल्म निर्माता संजय गुप्ता कहते हैं, "मैं खान से प्रभावित था। उनसे प्रेरित होकर ही मैं निर्माता बना। वह हमारे नायक थे। उनके निधन से हमें वाकई सदमा पहुंचा है।"
फिरोज को बेंगलुरू से काफी लगाव था। इसकी वजह यह थी कि बेंगलुरू उनका जन्म स्थान था। उनके एक करीबी दोस्त शिबू कहते हैं, "फिरोज को यह शहर खूब पसंद था। अधिकांश समय वह यहां अपने फार्म हाउस में ठहरा करता था। बेंगलुरू की रेसिंग दुनिया में उसकी खास दिलचस्पी थी।"
फिरोज खान ने वर्ष 1960 में फिल्म 'दीदी' से अपने सिने करियर की शुरुआत की। बाद में 'आरजू', 'औरत', 'सफर' जैसी फिल्मों में उन्हें काम करने का मौका मिला। 'कुर्बानी' और 'धर्मात्मा' जैसी फिल्में बनाकर उन्होंने शोहरत बटोरी। फिल्म 'आदमी और इंसान' के लिए उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। अस्सी और नब्बे के दशकों में उनकी फिल्म 'दयावान' और 'यलगार' लोगों को खूब पसंद आई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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