श्रीलंका में सैन्य अभियान पूरा, करुणानिधि ने भूख हड़ताल तोड़ी (लीड-3)
करुणानिधि ने शीतल पेय ग्रहणकर अपना अनशन तोड़ा। वह चेन्नई में डीएमके के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई के स्मारक के सामने में भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। इससे पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा, "श्रीलंका में सरकार की क्रूर कार्रवाई से तमिल समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं। मैंने उन लोगों की खातिर अपनी जान कुर्बान करने का फैसला किया है। "
उन्होंने कहा, "लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने जब रविवार को एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा की तो मैं अच्छी खबर सुनने के लिए पूरी रात टेलीविजन और रेडियो से चिपका रहा। जब कोई शुभ समाचार नहीं आया तो पूरे तमिल जगत की ओर से मैंने यह प्रयास शुरू किया।"
अन्नादुरई के स्मारक के सामने करुणानिधि के साथ उनकी दोनों पत्नियां, बेटे एम.के.स्टालिन, बेटी और राज्यसभा सांसद कानीमोझी, भतीजे दयानिधि मारन और राज्य के विद्युत मंत्री एकरोट एन.वीरसामी भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी भूख हड़ताल पर बैठे करुणानिधि से टेलीफोन पर बातचीत की और उन्हें आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार श्रीलंका सरकार को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए राजी करने के वास्ते हर संभव कदम उठा रही है।
इसी बीच श्रीलंका में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक बैठक हुई, जिसमें कहा गया कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त कर दिया है। श्रीलंका सरकार ने कहा कि अब पहली प्राथमिकता युद्ध प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों को निकालने और उनकी जान बचाने की है।
श्रीलंका के इस निर्णय के बारे में करुणानिधि को गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने फोन पर जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने अनशन तोड़ा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "श्रीलंका ने संघर्षविराम की घोषणा कर दी है। इसलिए मैं अनशन तोड़ रहा हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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